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केदारनाथ धाम में पिछले 20 दिनों में 60 घोड़ों और खच्चरों की हुई मौत, पढ़ें पूरी खबर

Mules : File Photo (ANI )
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केदारनाथ धाम में पिछले 20 दिनों में 60 घोड़ों और खच्चरों की हुई मौत, पढ़ें पूरी खबर

 

हिन्दू धर्म के लोगों के लिए अहम तीर्थ स्थलों में से एक है केदारनाथ धाम, हर साल केदारनाथ धाम के कपाट खुलते ही देश के कोने-कोने से श्रद्धालुओं की भीड़ जमा हो जाती है। केदारनाथ धाम जाने के लिए पहले आपको पहले सोनप्रयाग जाना होगा उसके बाद वहां से गौरीकुंड और फिर उसके बाद गौरीकुंड से पैदल ही केदारनाथ धाम जाना होगा।

इसी पैदल यात्रा में अहम भूमिका निभाते हैं घोड़े और खच्चर, श्रद्धालु या तो पैदल अपनी यात्रा पूरी करते हैं या फिर घोड़े व खच्चर पर बैठकर केदारनाथ धाम तक जाते हैं। बताया जा रहा है कि कोरोना महामारी के चलते केदारनाथ धाम में पिछले कुछ सालों में श्रदालुओं की आवा-जाही काम थी, इसलिए इस साल वहाँ श्रद्धालुओं की भयंकर भीड़ उमड़ रही है। ऐसे में जानकारी मिल रही है कि यात्रियों को धाम तक पहुंचाने वाले घोड़ो और खच्चरों की अधिक काम करने के कारण मौत हो रही है। स्थानीय लोगों का कहना कि अधिक पैसे कमाने के चक्कर में घोड़े और खच्चरों के मालिक अपने जानवरों को नशीले पदार्थ खिला कर काम करवा रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पिछले 20 दिनों में केदारनाथ धाम में काम करने वाले 60 जानवरों की नशीले पदार्थ का सेवन करने व जरुरत से अधिक काम करने के चलते उनकी मौत हो गयी है। बता दें इन जानवरों के लिए ना तो रहने की कोई समुचित व्यवस्था है और ना ही इनके मरने के बाद विधिवत दाह संस्कार किया जा रहा है। केदारनाथ पैदल मार्ग पर घोड़े-खच्चरों के मरने के बाद मालिक एवं हाॅकर उन्हें वहीं पर फेंक रहे हैं, जो सीधे मंदाकिनी नदी में गिरकर नदी को प्रदूषित कर रहे हैं।

ऐसे में मौके पर मौजूद लोग मरे हुए जानवरों की फोटो तथा वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर रहे हैं। इसके साथ वीडियो बनाने वाले लोग सोशल मीडिया के माध्यम से जनता को वहाँ के जानवरों पर हो रहे अत्याचारों के प्रति जागरूक कर रहे हैं।

 

 

नियमों के मुताबिक, खच्चर के संचालकों को जानवर से सिर्फ एक यात्रा कराने की परमिशन है, लेकिन यात्रा में खुलेआम धड़ल्ले से इस नियम की धज्जियां उड़ रही हैं। बता दें कि साल 2013 की त्रासदी से पहले केदारनाथ मार्ग पर जानवरों के लिए चार स्टॉप और रेस्ट एरिया थे, लेकिन उस त्रासदी के बाद से कोई स्टॉप और रेस्ट एरिया नहीं है। यात्रा शुरू होने से पहले पशुपालन मंत्री सौरभ बहुगुणा ने भी खच्चर संचालकों को जानवरों पर बोझ न डालने की सलाह दी थी, लेकिन उसका कोई फायदा नहीं हुआ।