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बिहार वोटर लिस्ट मामले में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, SIR प्रक्रिया को दी मंजूरी

Supreme Court of India ने बुधवार को बिहार की वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) मामले में बड़ा फैसला सुनाया। अदालत ने कहा कि Election Commission of India को SIR प्रक्रिया चलाने का पूरा अधिकार है और इसमें किसी संवैधानिक या कानूनी नियम का उल्लंघन नहीं हुआ है।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग को SIR के दौरान नागरिकता की जांच करने का अधिकार है। हालांकि, कोर्ट ने कहा कि अगर किसी व्यक्ति का नाम वोटर लिस्ट में शामिल नहीं किया जाता, तो इसका मतलब यह नहीं होगा कि उसकी नागरिकता खत्म हो गई है।

अदालत ने कहा कि नागरिकता साबित न कर पाने के आधार पर जिन लोगों के नाम हटाए जाएंगे, उनके मामलों की आगे अलग से जांच होगी। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि ऐसे मामलों को संबंधित सक्षम प्राधिकरण के पास भेजा जाए ताकि उचित फैसला लिया जा सके। कोर्ट ने कहा कि SIR का सीधा संबंध निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव से है। संविधान और जनप्रतिनिधित्व कानून के तहत चुनाव आयोग को वोटर लिस्ट में संशोधन और पुनरीक्षण करने का अधिकार प्राप्त है।

क्या है SIR?

SIR यानी विशेष गहन पुनरीक्षण एक अभियान है, जिसे चुनाव आयोग ने पिछले साल जून में बिहार से शुरू किया था। इसका उद्देश्य वोटर लिस्ट से फर्जी, डुप्लीकेट, अयोग्य और मृत मतदाताओं के नाम हटाना था। आयोग ने “अवैध प्रवासियों” के नाम शामिल होने की आशंका भी जताई थी। हालांकि, विपक्षी दलों ने इस अभियान का विरोध किया था। विपक्ष का आरोप था कि यह प्रक्रिया भाजपा को फायदा पहुंचाने के लिए चलाई जा रही है।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि चुनाव आयोग द्वारा अपनाई गई प्रक्रिया निष्पक्ष और संवैधानिक उद्देश्य पर आधारित है। अदालत ने माना कि इतने बड़े स्तर पर की गई इस प्रक्रिया में पर्याप्त सुरक्षा उपाय शामिल किए गए थे और इसे असंतुलित या अनुचित नहीं कहा जा सकता।

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न्यूज़ मोबाइल ब्यूरो

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