पत्रकारों के साथ दुर्व्यवहार पर BJP का फूटा गुस्सा, अमित मालवीय बोले- ‘चुनिंदा आक्रोश’ अस्वीकार्य
दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक के विरोध प्रदर्शन के दौरान पत्रकारों को निशाना बनाए जाने पर भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी ने इसे 'चुनिंदा आक्रोश' करार दिया है।

दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट (NEET) पेपर लीक के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान पत्रकारों के साथ हुए बर्ताव को लेकर सियासत गरमा गई है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इस मामले में ‘चुनिंदा आक्रोश’ (Selective Outrage) की कड़ी आलोचना की है। पार्टी का कहना है कि मीडियाकर्मियों को निशाना बनाए जाने का कोई औचित्य नहीं हो सकता और यह पूरी तरह से अस्वीकार्य है।
अमित मालवीय ने सोशल मीडिया पर जताई चिंता
भाजपा आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट के जरिए इस घटना पर गहरा दुख और रोष व्यक्त किया।
उन्होंने लिखा कि प्रदर्शन के दौरान कुछ पत्रकारों को विशेष रूप से निशाना बनाया गया और महिला पत्रकारों के साथ यौन उत्पीड़न जैसी शर्मनाक हरकतें की गईं। मालवीय ने दो टूक कहा कि इस तरह का व्यवहार किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता है।
There is a lot of chatter about sections of the media in the aftermath of the recent protest at Jantar Mantar. It has become almost fashionable to dismiss any journalist or media house one disagrees with as “godi media.” What happened to some journalists at the protest was… pic.twitter.com/v9j87QuuSl
— Amit Malviya (@amitmalviya) July 26, 2026
मीडिया की स्वतंत्रता पर दोहरे रवैये का आरोप
अमित मालवीय ने आगे कहा कि किसी भी असहमति के बाद मीडिया घरानों या पत्रकारों को ‘गोदी मीडिया’ कहकर खारिज करना एक फैशन सा बन गया है।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि मीडिया की स्वतंत्रता का पैमाना सभी के लिए एक समान होना चाहिए, न कि केवल उन लोगों के लिए जिनसे वैचारिक असहमति हो।
नीट विरोध और आगे की राजनीतिक हलचल
-
नीट परीक्षा में कथित गड़बड़ियों और पेपर लीक को लेकर जंतर-मंतर पर लंबे समय से विरोध प्रदर्शन चल रहा है।
-
इन प्रदर्शनों के बीच सरकार और परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग जोर पकड़ रही है।
-
संसद में परीक्षाओं में धांधली रोकने के लिए कड़े कानूनी प्रावधानों वाला विधेयक लाए जाने की भी चर्चा है।





