Fraud and Scam

बेंगलुरु में 76 वर्षीय रिटायर्ड कर्मचारी के साथ साइबर ठगी — फर्जी वर्चुअल कोर्ट बनाकर उड़ाए ₹33.7 लाख

साइबर ठगों ने तकनीक का इस्तेमाल करते हुए ठगी का एक ऐसा तरीका अपनाया, जिसने पुलिस तक को हैरान कर दिया। शहर के एक 76 वर्षीय सेवानिवृत्त निजी क्षेत्र के कर्मचारी से ₹33.7 लाख की ठगी की गई। अपराधियों ने एक फर्जी वर्चुअल कोर्ट (Virtual Court) तैयार किया और खुद को वरिष्ठ पुलिस और जांच एजेंसियों के अधिकारी बताकर उन्हें जाल में फंसा लिया।

पीड़ित, जिनका नाम भास्कर राव (बदला हुआ नाम) बताया गया है, ने कहा कि पूरा सेटअप इतना असली लग रहा था कि उन्हें शक ही नहीं हुआ। “कोर्ट और अधिकारी सब असली लग रहे थे। जज की पोशाक में एक व्यक्ति कानूनी प्रक्रिया की बातें कर रहा था, इसलिए मुझे कोई शक नहीं हुआ,” उन्होंने Deccan Herald को बताया।

यह घटना 15 अक्टूबर से शुरू हुई, जब राव को एक कॉल आया। कॉलर ने खुद को TRAI (टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया) का अधिकारी बताया और उनके मोबाइल नंबर से जुड़ी गड़बड़ियों का हवाला दिया। फिर उसने कॉल ट्रांसफर कर दी एक व्यक्ति को, जिसने खुद को एन्फोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED) के अधिकारी जयप्रभाकर चौधरी बताया। उस व्यक्ति ने राव पर मनी लॉन्ड्रिंग में शामिल होने का आरोप लगाया और कहा कि अगर उन्होंने सहयोग नहीं किया तो उन्हें गिरफ्तार किया जाएगा। अगले कुछ दिनों तक ठग लगातार राव से संपर्क में रहे और उन्हें बताया कि उन पर “निगरानी रखी जा रही है।”

बाद में, उन्हें एक वीडियो कॉल पर समाधान पवार नाम के व्यक्ति से जोड़ा गया, जिसने खुद को IPS अधिकारी और ED के अतिरिक्त निदेशक के रूप में पेश किया। उसने राव को एक डिजिटल कोर्ट नोटिस दिखाया, जिसमें कथित तौर पर एक प्राइवेट एयरलाइन के कार्यकारी नरेश गोयल की शिकायत दर्ज बताई गई थी। 29 अक्टूबर को ठगों ने राव को एक वर्चुअल कोर्ट हियरिंग पर बुलाया। वीडियो कॉल में एक व्यक्ति जज की पोशाक में दिखाई दिया और “सुनवाई” के दौरान राव को “जमानत” दी गई। लेकिन उनसे कहा गया कि उन्हें ₹10 लाख ‘कोर्ट फीस’ के रूप में जमा कराने होंगे।

इससे पहले, ठग पहले ही उनसे ₹23.7 लाख ट्रांसफर करवा चुके थे, यह कहकर कि यह रकम “आरबीआई सत्यापन” के लिए है और 72 घंटे में लौटा दी जाएगी। आखिर में राव को एहसास हुआ कि वे ठगी का शिकार हो चुके हैं — तब तक वे कुल ₹33.7 लाख गंवा चुके थे। शिकायत मिलने के बाद नॉर्थ बेंगलुरु साइबर क्राइम पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस ने भारतीय दंड संहिता (IPC) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) के तहत जांच शुरू की है। अधिकारी अब ठगों के डिजिटल ट्रेल और बैंक खातों का पता लगाने में जुटे हैं।

पुलिस ने बताया कि यह मामला दिखाता है कि साइबर अपराधी अब सरकारी एजेंसियों और कानून व्यवस्था पर जनता के भरोसे का फायदा उठाकर बेहद यथार्थ तरीके से धोखाधड़ी कर रहे हैं।

अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी अज्ञात कॉल या संदेश से सावधान रहें, खासकर जब कोई व्यक्ति खुद को सरकारी अधिकारी या बैंक प्रतिनिधि बताकर पैसे या दस्तावेज मांगे। किसी भी संदेह की स्थिति में आधिकारिक वेबसाइट या हेल्पलाइन से जानकारी की पुष्टि जरूर करें।

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न्यूज़ मोबाइल ब्यूरो

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