AI साइबर सुरक्षा के लिए बना सबसे बड़ा खतरा: WEF की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

नई दिल्ली: वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) की हालिया ‘ग्लोबल साइबर सिक्योरिटी आउटलुक 2026’ रिपोर्ट ने दुनिया भर में साइबर सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट के अनुसार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब वैश्विक स्तर पर साइबर सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा ‘डिस्ट्रैक्टर’ बनकर उभरा है।
AI का नकारात्मक प्रभाव
आंकड़े बताते हैं कि 94% संगठनों ने AI को साइबर जोखिमों को बदलने वाली सबसे महत्वपूर्ण ताकत माना है। वहीं, 87% संगठनों का मानना है कि ‘AI कमजोरियां’ सबसे तेजी से बढ़ने वाला साइबर खतरा हैं। साइबर अपराधी अब जनरेटिव AI का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर फिशिंग कैंपेन को ऑटोमेट करने, डीपफेक ऑडियो-वीडियो बनाने और जटिल सोशल इंजीनियरिंग हमलों को अंजाम देने के लिए कर रहे हैं।
कॉरपोरेट जगत और आम लोगों पर असर
इस खतरे का असर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। 2026 में 34% संगठनों के लिए ‘डेटा लीक’ सबसे बड़ी चिंता बन गया है, जो 2025 में केवल 22% था। दिलचस्प बात यह है कि कॉरपोरेट स्तर पर पहली बार CEOs ने रैंसमवेयर के बजाय ‘साइबर-इनेबल्ड फ्रॉड’ और फिशिंग को अपना सबसे बड़ा डर बताया है।
आम नागरिकों की बात करें, तो 62% लोग किसी न किसी रूप में फिशिंग, विशिंग या स्मिशिंग जैसे हमलों का शिकार हुए हैं। 37% लोग पेमेंट फ्रॉड और 32% लोग पहचान की चोरी (Identity Theft) का सामना कर रहे हैं।
सुरक्षा में सुधार की कोशिशें
चिंताजनक बात यह है कि 31% लोग अपने देश की महत्वपूर्ण बुनियादी सुविधाओं (Critical Infrastructure) की सुरक्षा को लेकर आश्वस्त नहीं हैं। हालांकि, कंपनियां अब सतर्क हो रही हैं। AI टूल्स को तैनात करने से पहले उनकी सुरक्षा की जांच करने वाली संस्थाओं की संख्या 2025 के 37% से बढ़कर 2026 में 64% हो गई है। फिर भी, 29% कंपनियां अभी भी बिना किसी औपचारिक सुरक्षा प्रक्रिया के AI का उपयोग कर रही हैं, जो एक गंभीर जोखिम है।






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