पंजाब फार्मा ऑफिसर भर्ती परीक्षा में बड़ा फर्जीवाड़ा, 13 लाख तक की रिश्वत देकर नकल कराने वाला रैकेट बेनकाब, 35 गिरफ्तार
परीक्षा शुरू होने के बाद वायरलेस डिवाइस और हिडन कैमरे से भेजे जाते थे उत्तर, पुलिस ने स्पष्ट किया कि पेपर लीक का कोई सबूत नहीं मिला है।

पंजाब पुलिस ने फार्मेसी ऑफिसर भर्ती परीक्षा में चल रहे एक बड़े अंतर-राज्यीय नकल गिरोह का भंडाफोड़ किया है। रविवार को आयोजित इस परीक्षा में सॉल्वर गैंग और नकल कराने वाले नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए कुल 35 लोगों को हिरासत में लिया गया है। इनमें 28 उम्मीदवार और 7 गिरोह के संचालक शामिल हैं।
कैसे काम करता था यह नकल गिरोह?
पुलिस जांच के मुताबिक, यह गैंग परीक्षा केंद्रों में बैठे उम्मीदवारों को परीक्षा शुरू होने के बाद लाइव उत्तर भेजता था। फ़िरोज़पुर सेंटर पर परीक्षा दे रहे आयुष नाम के एक उम्मीदवार ने कथित तौर पर हिडन पेन कैमरे से प्रश्न पत्र की फोटो खींची।
इन तस्वीरों को व्हाट्सएप के जरिए हरियाणा के भिवानी में बैठे साजन को भेजा गया। इसके बाद साजन ने फरीदकोट के सोसाइटी नगर में बने एक अस्थायी कंट्रोल रूम में बैठे दीपक को यह पेपर फॉरवर्ड किया। दीपक और मंजीत सिंह जैसे आरोपी परीक्षा दे रहे छात्रों को वायरलेस डिवाइस के जरिए जवाब भेजते थे।
3.5 लाख से 13 लाख रुपये तक की वसूली
पुलिस पूछताछ में सामने आया है कि इस गिरोह ने परीक्षा पास कराने के एवज में उम्मीदवारों से 3.5 लाख रुपये से लेकर 13 लाख रुपये तक वसूले थे। कुछ उम्मीदवारों ने सुरक्षा के तौर पर पोस्ट-डेटा चेक भी दिए थे।
गिरोह का मुख्य मास्टरमाइंड फरीदकोट-कोटकपूरा रोड स्थित एक होटल में रुका था, जहाँ परीक्षा की सुबह उम्मीदवारों को वायरलेस डिवाइस बांटे गए थे। फरीदकोट और फ़िरोज़पुर के परीक्षा केंद्रों पर हुई इस धांधली में पंजाब, हरियाणा और राजस्थान से जुड़े संदिग्धों के नाम सामने आए हैं।
पुलिस ने क्या कहा?
अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल पेपर लीक होने या परीक्षा अधिकारियों की संलिप्तता का कोई सबूत नहीं मिला है। नकल की पूरी प्रक्रिया परीक्षा शुरू होने के बाद अपनाई गई थी। पुलिस ने फरीदकोट और फ़िरोज़पुर से कुल 27 बैटरी चालित वायरलेस माइक्रो डिवाइस बरामद किए हैं। आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और आईटी एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है।





