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पाकिस्तान में बड़ा सैन्य बदलाव: सरकार ने पेश किया 27वां संविधान संशोधन बिल

पाकिस्तान की राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। संघीय सरकार ने शनिवार को सीनेट में 27वां संविधान संशोधन विधेयक पेश किया है, जिसके जरिए देश की सैन्य कमान व्यवस्था को पूरी तरह बदलने और नागरिक-सैन्य ताकतों के बीच संतुलन को नए सिरे से परिभाषित करने का प्रस्ताव रखा गया है।

‘डॉन’ अखबार के मुताबिक, इस बिल में चेयरमैन, जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी (CJCSC) के पद को खत्म कर चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज (CDF) नामक एक नया शक्तिशाली पद बनाने का सुझाव दिया गया है। यह पद तीनों सेनाओं — थलसेना, नौसेना और वायुसेना — का सर्वोच्च कमांडर होगा, और इसे आर्मी चीफ (COAS) के पास ही दिया जाएगा। यानी अब सेना प्रमुख ही सभी तीनों सेनाओं के प्रमुख के रूप में काम करेंगे।

अगर यह संशोधन पारित हो जाता है, तो यह पाकिस्तान के संविधान के अनुच्छेद 243 में बड़ा बदलाव लाएगा, जो सशस्त्र बलों के नियंत्रण से जुड़ा है। इससे सेना प्रमुख को तीनों सेनाओं का संवैधानिक रूप से सर्वोच्च प्रमुख माना जाएगा। बिल के अनुसार, राष्ट्रपति सेना, नौसेना और वायुसेना के प्रमुखों की नियुक्ति प्रधानमंत्री की सलाह पर करेंगे। साथ ही, आर्मी चीफ एक साथ चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज के रूप में भी कार्य करेंगे।

इसके अलावा, एक नया पद कमांडर ऑफ नेशनल स्ट्रैटेजिक कमांड बनाया जाएगा, जो पाकिस्तान के परमाणु और रणनीतिक हथियारों की देखरेख करेगा। इस पद पर नियुक्ति प्रधानमंत्री द्वारा, चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज की सिफारिश पर की जाएगी। संविधान संशोधन में एक और खास प्रस्ताव है — फाइव-स्टार अफसरों (जैसे फील्ड मार्शल, एयर मार्शल या एडमिरल ऑफ द फ्लीट) को आजीवन पद, वर्दी और विशेषाधिकार देने का। इन्हें केवल संसद द्वारा ‘महाभियोग प्रक्रिया’ (Article 47) के तहत ही हटाया जा सकेगा, ठीक उसी तरह जैसे राष्ट्रपति को।

कानून मंत्री आजम नजीर तारड़ ने कहा कि यह बिल सेना की कमान व्यवस्था को “आधुनिक रूप देने” और हाल के बदलावों को औपचारिक रूप से मान्यता देने के लिए लाया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आर्मी चीफ जनरल आसिम मुनीर, जिन्हें फील्ड मार्शल की मानद उपाधि दी गई थी, अब इस संशोधन के बाद औपचारिक रूप से यही दर्जा रखेंगे। उन्होंने बताया कि CJCSC का पद 27 नवंबर को खत्म हो जाएगा, जब जनरल साहिर शामशाद मिर्ज़ा का कार्यकाल समाप्त होगा। उसके बाद यह पद स्थायी रूप से समाप्त कर दिया जाएगा और उसकी जिम्मेदारियां चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज को सौंपी जाएंगी।

इस प्रस्ताव ने इस्लामाबाद की राजनीति में गर्मी ला दी है। सत्ताधारी पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज़ (PML-N) इसे ‘तकनीकी सुधार’ बता रही है, जबकि विपक्ष और नागरिक समाज संगठनों का कहना है कि यह कदम सेना के प्रभाव को और बढ़ा सकता है और नागरिक नियंत्रण को कमजोर करेगा। आलोचकों ने इस संशोधन के समय पर भी सवाल उठाए हैं, खासकर तब जब कुछ महीने पहले ही जनरल मुनीर को भारत-पाकिस्तान टकराव के बाद फील्ड मार्शल की उपाधि दी गई थी।

सीनेट में पेश किए जाने के बाद बिल को नेशनल असेंबली और सीनेट की कानून एवं न्याय स्थायी समितियों को संयुक्त समीक्षा के लिए भेज दिया गया है। सत्र के दौरान जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम (JUI-F) की सांसद अलीया कमरान और सीनेटर कमरान मुर्तज़ा ने बैठक का बहिष्कार किया, यह कहते हुए कि इस बिल में वे धाराएं फिर शामिल कर दी गई हैं जिन्हें पहले 26वें संशोधन से हटा दिया गया था। प्राथमिक चर्चा के बाद समिति ने रविवार तक बैठक स्थगित कर दी है।

अगर यह संशोधन लागू होता है, तो यह 1980 के दशक के बाद पाकिस्तान की सेना की संरचना में सबसे बड़ा परिवर्तन होगा — जो आने वाले वर्षों में देश की सत्ता संतुलन की तस्वीर पूरी तरह बदल सकता है।

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न्यूज़ मोबाइल ब्यूरो

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