US-Russia Sanctions Bill: ट्रंप ने ईरान को भी टैरिफ बिल में शामिल करने की मांग की, भारत पर 100% शुल्क का खतरा बरकरार

Washington DC: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस पर प्रस्तावित प्रतिबंध (Russia Sanctions Bill) में बड़ा बदलाव करने की मांग की है। ट्रंप चाहते हैं कि इस विधेयक में ईरान को भी शामिल किया जाए, ताकि जरूरत पड़ने पर उस पर भी केवल प्रतिबंध नहीं बल्कि टैरिफ (Tariff) लगाया जा सके। इस बीच, रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों, जिनमें भारत भी शामिल है, पर 100% तक टैरिफ लगाने का प्रस्ताव अभी भी बरकरार है।
ट्रंप ने क्या कहा?
व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि यदि आवश्यकता पड़े तो कांग्रेस को इस विधेयक में संशोधन कर ईरान पर भी टैरिफ लगाने का अधिकार राष्ट्रपति को देना चाहिए।
उन्होंने कहा, “अगर जरूरत पड़ी तो मैं चाहता हूं कि ईरान को भी सिर्फ प्रतिबंधों तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उस पर टैरिफ लगाने का प्रावधान भी हो।”
ट्रंप ने यह भी बताया कि दिवंगत सीनेटर लिंडसे ग्राहम भी इस दिशा में बदलाव चाहते थे।
क्या है रूस प्रतिबंध विधेयक?
अमेरिकी सीनेट ने इस विधेयक को आगे बढ़ाने के लिए प्रक्रिया संबंधी मतदान में 86-12 के अंतर से मंजूरी दी है।
इसका उद्देश्य यूक्रेन युद्ध के बीच रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाना है। प्रस्ताव के अनुसार, रूस से तेल और गैस खरीदने वाले प्रमुख देशों के आयात पर अमेरिकी राष्ट्रपति 100% तक टैरिफ लगा सकते हैं।
इस सूची में भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अज़रबैजान जैसे देश शामिल हैं। हालांकि, राष्ट्रपति को इन टैरिफ को हटाने का अधिकार भी दिया जाएगा।
भारत पर क्या पड़ सकता है असर?
यदि यह विधेयक कानून बन जाता है, तो भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों पर इसका असर पड़ सकता है।
अगस्त 2025 में ट्रंप प्रशासन ने भारत द्वारा रूसी कच्चे तेल की खरीद को लेकर भारतीय वस्तुओं पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाया था। इसके बाद भारत पर कुल अमेरिकी टैरिफ 50% तक पहुंच गया था, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापार वार्ता प्रभावित हुई थी।
ईरान संकट के बाद बढ़ी रूसी तेल की खरीद
फरवरी 2026 में अमेरिका-ईरान संघर्ष और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में व्यवधान के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई थी। इसके बाद अमेरिका ने भारत को रूसी तेल खरीदने के लिए अस्थायी छूट दी थी।
इस छूट के बाद जून 2026 में भारत का रूसी कच्चे तेल का आयात 34% बढ़कर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। रिपोर्ट के अनुसार, यह आयात 4.5 अरब यूरो का था और रूस के कुल कच्चे तेल निर्यात राजस्व का लगभग 36% हिस्सा इसी से आया।
व्यापार समझौते पर भी पड़ सकता है असर
भारत और अमेरिका इस समय एक द्विपक्षीय व्यापार समझौते (Bilateral Trade Agreement) पर बातचीत कर रहे हैं। दोनों देश भारतीय निर्यात पर अमेरिकी टैरिफ को घटाकर लगभग 18% करने की दिशा में चर्चा कर रहे हैं।
फिलहाल अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भारतीय वस्तुओं पर 15% का अस्थायी टैरिफ लागू है। यदि नया प्रतिबंध विधेयक कानून बनता है, तो दोनों देशों के बीच चल रही व्यापार वार्ताओं पर इसका असर पड़ सकता है।
अभी बाकी है लंबी प्रक्रिया
रूस प्रतिबंध विधेयक को अभी सीनेट की अन्य प्रक्रियाओं से गुजरना है। इसके बाद इसे हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में मंजूरी मिलनी होगी, जहां सितंबर में इस पर आगे चर्चा होने की संभावना है।





