लखनऊ पुलिस का बड़ा खुलासा, इंटरनेशनल साइबर फ्रॉड सिंडिकेट को ई-सिम सप्लाई करने वाले रैकेट का पर्दाफाश, दो गिरफ्तार
डिजिटल अरेस्ट और करोड़ों की ठगी के मामलों में शामिल था यह नेटवर्क, भोले-भाले लोगों के दस्तावेजों का होता था गलत इस्तेमाल।

लखनऊ पुलिस ने साइबर अपराध के खिलाफ एक बड़ा अभियान चलाते हुए अवैध ई-सिम (e-SIM) एक्टिवेशन नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। यह रैकेट भारतीय मोबाइल नंबरों को विदेशी साइबर अपराधियों तक पहुंचाता था। इन नंबरों का इस्तेमाल ‘डिजिटल अरेस्ट’ और अन्य ऑनलाइन ठगी के लिए किया जा रहा था। पुलिस ने इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है और 35 लाख रुपये फ्रीज किए हैं।
ऐसे खुला पूरा मामला
यह कार्रवाई लखनऊ साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन द्वारा एक हाई-प्रोफाइल मामले की जांच के दौरान सामने आई। जांचकर्ताओं ने पाया कि एक ठगी की शुरुआत शहर के ही एक सिम पॉइंट-ऑफ-सेल (PoS) आउटलेट से जारी किए गए मोबाइल नंबर से हुई थी। पड़ताल में पता चला कि सिम कार्ड एक ऐसे आर्थिक रूप से कमजोर व्यक्ति के नाम पर रजिस्टर्ड था, जिसे इस बात की कोई जानकारी नहीं थी कि उसके दस्तावेजों का इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय ठग कर रहे हैं।
अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (क्राइम) किरण यादव के अनुसार, जांच के तार अधिकृत सिम PoS एजेंट सुमित कुमार रावत से जुड़े। पूछताछ में सामने आया कि सुमित ने इशू यादव के साथ मिलकर लगभग 100 खाली सिम कार्ड अवैध रूप से एक्टिवेट किए थे।
डबल ई-केवाईसी का खेल
आरोपी ग्राहकों को सिम एक्टिवेशन या पोर्टेबिलिटी में तकनीकी समस्या का झांसा देकर आधार-आधारित ई-केवाईसी दो बार पूरी करवाते थे। ग्राहक को एक सिम मिलने के बाद, दूसरी सिम उसकी जानकारी के बिना चुपचाप एक्टिवेट कर ली जाती थी।
इन अवैध सिम कार्ड्स को बाद में ई-सिम में बदल दिया जाता था, ताकि उन्हें क्यूआर कोड के जरिए दूर बैठकर भी एक्टिवेट किया जा सके। पुलिस का आरोप है कि रावत इन ई-सिम प्रोफाइल्स को मास्टरमाइंड प्रवीण श्रीवास्तव उर्फ अमित को 325 रुपये प्रति सिम के हिसाब से बेचता था।
टेलीग्राम और क्रिप्टो के जरिए होती थी डील
जांच में यह भी खुलासा हुआ कि प्रवीण इन ई-सिम को टेलीग्राम के माध्यम से मुख्य तौर पर चीन के साइबर सिंडिकेट्स को करीब 50 यूएसडीटी (USDT) प्रति प्रोफाइल बेचता था। भुगतान के लिए बायबिट (BYBIT) क्रिप्टो एक्सचेंज पर पीयर-टू-पीयर ट्रांजैक्शन का इस्तेमाल किया जाता था। पुलिस ने प्रवीण के क्रिप्टो वॉलेट से 144 यूएसडीटी भी बरामद किए हैं। अधिकारियों का मानना है कि इन भारतीय ई-सिम का उपयोग देश भर में हो रहे सीमा पार के साइबर अपराधों और डिजिटल अरेस्ट घोटालों में बड़े पैमाने पर किया जा रहा था।





