भारत की नई उपलब्धि: चंद्रयान-2 ने बनाया चांद के ध्रुवों का अब तक का सबसे विस्तृत नक्शा

भारत के चंद्रयान-2 ऑर्बिटर ने एक और बड़ी सफलता हासिल की है। इस यान ने चांद के ध्रुवीय क्षेत्रों की बेहद स्पष्ट रडार तस्वीरें भेजी हैं, जिनसे वहां पानी की बर्फ और मिट्टी की संरचना के बारे में अहम जानकारी मिली है। 2019 से चांद की कक्षा में घूम रहा यह ऑर्बिटर लगातार वैज्ञानिकों को नई-नई जानकारियां भेज रहा है, जिससे चांद के उत्तरी और दक्षिणी ध्रुवों को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिल रही है।
अहमदाबाद स्थित स्पेस एप्लीकेशंस सेंटर (SAC) के वैज्ञानिकों ने चंद्रयान-2 के ड्यूल फ्रीक्वेंसी सिंथेटिक अपर्चर रडार (DFSAR) से मिले आंकड़ों की मदद से चांद का अब तक का सबसे विस्तृत रडार नक्शा तैयार किया है। इन तस्वीरों की रिज़ॉल्यूशन बेहद उच्च है — 25 मीटर प्रति पिक्सल। यह डेटा पिछले पांच वर्षों में लिए गए 1,400 से अधिक रडार मापों पर आधारित है, जिसमें चांद के उत्तरी और दक्षिणी ध्रुवों के 80° से 90° अक्षांश तक का क्षेत्र शामिल है।
ISRO has come up with advanced data products from the Chandrayaan-2 lunar orbiter for deeper understanding of the lunar polar regions. These include important parameters describing physical and dielectric properties of the Moon’s surface. This is India’s major value addition… pic.twitter.com/5w2eQ4OVky
— ISRO (@isro) November 8, 2025
इस उन्नत रडार प्रणाली की खासियत यह है कि यह ऊर्ध्वाधर (Vertical) और क्षैतिज (Horizontal) दोनों दिशाओं में सिग्नल भेज और प्राप्त कर सकती है। इससे वैज्ञानिकों को चांद की सतह और उसके अंदरूनी परतों का बेहद सटीक अध्ययन करने में मदद मिलती है।
भारतीय वैज्ञानिकों ने खुद विकसित किए गए विशेष एल्गोरिद्म का उपयोग कर कई अहम पैरामीटरों का विश्लेषण किया — जैसे सर्कुलर पोलराइजेशन रेशियो (CPR), जो सतह के नीचे बर्फ की उपस्थिति का संकेत देता है। इसके साथ ही मिट्टी की सतही खुरदरापन, घनत्व और छिद्रता (porosity) जैसी विशेषताओं का भी अध्ययन किया गया।
इन नए निष्कर्षों से यह बात पक्की होती जा रही है कि चांद के ध्रुवीय इलाकों में पानी की बर्फ मौजूद है। इसके अलावा, यह डेटा चांद की भूगर्भीय संरचना और उसकी उत्पत्ति को समझने में भी मदद करेगा। वैज्ञानिकों का कहना है कि ये जानकारियां भविष्य में मानव मिशन और चंद्र सतह पर अनुसंधान केंद्र स्थापित करने के लिए बेहद उपयोगी साबित होंगी।
चंद्रयान-2 का यह योगदान भारत की अंतरिक्ष खोज और अनुसंधान क्षमता को एक नए स्तर पर लेकर गया है, जो आने वाले चंद्र अभियानों की नींव मजबूत करेगा।





