
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने देश के लिए दक्षिण-पश्चिम मानसून को लेकर अपनी नई भविष्यवाणी जारी की है, जो चिंताजनक है। विभाग ने मानसून के पूर्वानुमान को और घटाते हुए इसे केवल 90% तक रहने की संभावना जताई है। इसका अर्थ है कि इस वर्ष देश में ‘सामान्य से कम’ बारिश होने की आशंका है।
क्यों कम बारिश की है आशंका?
इस कमजोर मानसून के पीछे सबसे बड़ा कारण ‘अल नीनो’ (El Niño) को माना जा रहा है। प्रशांत महासागर में होने वाली इस असामान्य वॉर्मिंग प्रक्रिया के कारण दुनिया भर के मौसम पर विपरीत असर पड़ता है। 11 वर्षों में पहली बार मानसून के इतने कमजोर रहने की चेतावनी दी गई है। IMD के अनुसार, 84% संभावना है कि इस बार मानसून ‘कमजोर’ या ‘सामान्य से कम’ श्रेणी में रहेगा। भारत की 50 वर्षों की औसत वर्षा (Long Period Average) 87 सेमी है, जिसका 90% ही इस बार मिलने का अनुमान है।
किन क्षेत्रों पर होगा असर?
IMD की रिपोर्ट के मुताबिक, देश के चार प्रमुख क्षेत्रों में से तीन में सामान्य से कम बारिश होगी:
1. उत्तर-पश्चिम भारत: 92% से कम बारिश।
2. मध्य और दक्षिणी प्रायद्वीप: 94% से कम बारिश।
3. मानसून कोर जोन: इसमें मध्य, पूर्वी और पश्चिमी भारत के कृषि प्रधान क्षेत्र आते हैं, यहाँ भी बारिश कम रहने के आसार हैं।
केवल पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में सामान्य बारिश की उम्मीद है।
कृषि और अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
भारत की चार ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था काफी हद तक मानसून पर निर्भर है। देश की लगभग आधी खेती बिना सिंचाई वाली है और करोड़ों लोग जीविका के लिए कृषि पर निर्भर हैं। कम बारिश का सीधा असर फसलों और जल स्रोतों पर पड़ सकता है। इसके अलावा, जून महीने में पंजाब, हरियाणा, यूपी और गुजरात सहित कई राज्यों में लू (heatwaves) चलने की भी चेतावनी दी गई है, जिससे तापमान सामान्य से अधिक रहेगा।





