लखनऊ: राज्य विश्वविद्यालय परिसर स्थित बैंक शाखा में ₹2 करोड़ से अधिक का घोटाला, FIR दर्ज

लखनऊ के पारा थाना क्षेत्र में मोहन रोड पर स्थित एक राज्य विश्वविद्यालय परिसर के अंदर चल रही बैंक शाखा में करीब ₹2 करोड़ के वित्तीय घोटाले का मामला सामने आया है। इस मामले में बैंक मित्र समेत वर्ष 2020 से शाखा में तैनात रहे अन्य अज्ञात अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है।
आरोप है कि आरोपियों ने फर्जी दस्तावेज, नकली वाउचर और जाली फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) रसीदें बनाकर खाताधारकों के खातों से बड़ी रकम निकाल ली। शिकायतकर्ता राम सिंह यादव, निवासी सलेमपुर पतौरा गांव (पारा थाना क्षेत्र), ने बताया कि उनके बचत खाते से फर्जी बिल और वाउचर के जरिए ₹8.6 लाख की अवैध निकासी की गई। इसके अलावा उन्हें ₹10 लाख की एक फर्जी FD थमा दी गई, जबकि उनके नाम पर ही किसी तीसरे व्यक्ति के खाते में ₹10 लाख जमा कर बाद में बिना उनकी जानकारी के निकाल लिए गए।
FIR के अनुसार, पिछले 4–5 वर्षों से कई खाताधारकों के साथ इसी तरह की धोखाधड़ी की जा रही थी। पीड़ितों का आरोप है कि ग्राहकों को नकली FD दी जाती थीं और लेन-देन की जानकारी देने वाले जरूरी SMS अलर्ट जानबूझकर बंद कर दिए जाते थे, ताकि घोटाले का खुलासा न हो सके।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि जब गड़बड़ी सामने आने लगी, तो सबूत मिटाने के इरादे से बैंक शाखा में आग लगाने की कोशिश की गई। बाद में जब पीड़ितों ने अपने खातों का विस्तृत स्टेटमेंट निकलवाया, तो पता चला कि ज्यादातर आर्थिक रूप से कमजोर खाताधारकों के खातों से जाली हस्ताक्षरों के जरिए करोड़ों रुपये निकाल लिए गए हैं।
FIR में अब तक 25 से अधिक पीड़ितों के नाम दर्ज किए गए हैं, जिनमें राम सिंह यादव (₹18.6 लाख), सरोजनी (₹10 लाख), जानकी (₹13 लाख), अनीता वर्मा (₹10 लाख) और राम कुमार (₹10 लाख) शामिल हैं।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, मामले में धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश, जालसाजी, गबन और सबूत नष्ट करने से जुड़ी धाराओं में केस दर्ज किया गया है। पश्चिम जोन के डीसीपी विश्वजीत श्रीवास्तव ने बताया कि पारा थाना पुलिस ने FIR दर्ज कर ली है और सभी दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, ठगी गई रकम की वसूली कर पीड़ितों को लौटाने के प्रयास किए जाएंगे।





