ईरान में आर्थिक संकट के विरोध में उबाल, प्रदर्शन से अब तक 217 लोगों की मौत

तेहरान/वाशिंगटन. ईरान में बढ़ती महंगाई, कमजोर होती मुद्रा और गहराते आर्थिक संकट के खिलाफ देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नया तनाव पैदा कर दिया है. सरकार द्वारा प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आक्रामक टिप्पणियों ने स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है.
मानवाधिकार संगठनों का दावा: बड़े पैमाने पर हिंसा
अमेरिका स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी के अनुसार, अब तक कम से कम 62 लोगों की जान जा चुकी है और 2,300 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया है. टाइम मैगजीन की रिपोर्ट में एक चिकित्सक के हवाले से बताया गया है कि केवल छह अस्पतालों में ही 217 प्रदर्शनकारियों की मृत्यु हो चुकी है. इस बीच, सरकारी मीडिया प्रदर्शनकारियों को ‘आतंकवादी’ और ‘उपद्रवी तत्व’ करार देते हुए कड़ी कार्रवाई को उचित ठहराने की कोशिश कर रहा है.
खामेनेई का तीखा प्रहार: ट्रंप पर गंभीर आरोप
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने राष्ट्रपति ट्रंप पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति के “हाथ ईरानियों के खून से सने हुए हैं.” यह बयान जून में इजरायल के साथ हुए सैन्य टकराव और उसमें अमेरिकी सहयोग के संदर्भ में दिया गया.
सरकारी टेलीविजन पर प्रसारित अपने संबोधन में खामेनेई ने प्रदर्शनकारियों की आलोचना की, जबकि उनके समर्थकों ने “अमेरिका मुर्दाबाद” के नारे लगाए. उन्होंने कहा कि इस्लामिक गणराज्य त्याग और बलिदान से निर्मित हुआ है और किसी भी दबाव के आगे नहीं झुकेगा. खामेनेई ने चेतावनी देते हुए दावा किया कि ट्रंप का परिणाम भी वही होगा जो 1979 में ईरानी शाह का हुआ था.
ट्रंप की खुली धमकी: “जहां दर्द होगा, वहीं चोट”
दूसरी ओर, राष्ट्रपति ट्रंप ने अत्यंत कठोर रुख अपनाते हुए कहा कि ईरान “बेहद गंभीर संकट” में फंसा है. उन्होंने ईरानी सरकार को चेतावनी दी कि यदि प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी जारी रही, तो अमेरिका भी जवाबी कार्रवाई करेगा. हालांकि, ट्रंप ने स्पष्ट किया कि इसका अर्थ जमीनी सैन्य अभियान नहीं होगा, बल्कि ईरान को “सबसे संवेदनशील बिंदु पर निशाना बनाया जाएगा.”
एक साक्षात्कार में ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि 86 वर्षीय खामेनेई संभवतः देश छोड़कर जाने की तैयारी कर रहे हैं.
आर्थिक संकट की जड़ें
प्रदर्शन मुख्य रूप से तेजी से बढ़ रही महंगाई, ईरानी रियाल की गिरती कीमत और आम नागरिकों पर बढ़ते आर्थिक बोझ के विरोध में शुरू हुए हैं. अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और आंतरिक आर्थिक कुप्रबंधन ने स्थिति को और विकट बना दिया है, जिसके परिणामस्वरूप जनता सड़कों पर उतर आई है.
वर्तमान स्थिति में अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें ईरान पर टिकी हुई हैं, जहां आंतरिक असंतोष और बाहरी दबाव के बीच हालात किस दिशा में मोड़ लेते हैं, यह देखना बाकी है.





