भारत-चीन सीमा वार्ता में सकारात्मक प्रगति, LAC पर शांति बनाए रखने पर बनी सहमति

भारत और चीन के बीच पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) से जुड़े मुद्दों पर अहम बातचीत हुई। दोनों देशों ने सीमा पर शांति बनाए रखने और रिश्तों को सामान्य बनाने की दिशा में आगे बढ़ने पर सहमति जताई। यह बैठक बुधवार को बीजिंग में वर्किंग मैकेनिज्म फॉर कंसल्टेशन एंड कोऑर्डिनेशन (WMCC) के तहत आयोजित की गई।
विदेश मंत्रालय (MEA) ने बैठक को “रचनात्मक और भविष्य की ओर देखने वाली” बातचीत बताया। मंत्रालय के अनुसार, दोनों पक्षों ने सीमा क्षेत्रों की मौजूदा स्थिति की समीक्षा की और हाल के सकारात्मक बदलावों पर संतोष जताया। MEA ने कहा कि सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखने में हुई प्रगति से दोनों देशों के रिश्तों को धीरे-धीरे सामान्य बनाने में मदद मिली है। दोनों देशों ने चीन में होने वाली विशेष प्रतिनिधियों (SR) की अगली बैठक की तैयारी पर भी चर्चा की।
बैठक के दौरान सीमा निर्धारण, बॉर्डर मैनेजमेंट, आपसी सहयोग और सीमापार नदियों से जुड़े मुद्दों पर भी बातचीत हुई। भारतीय पक्ष ने सीमापार नदियों को लेकर विशेषज्ञ स्तर की अगली बैठक जल्द आयोजित करने की जरूरत पर जोर दिया।
दोनों देशों ने यह भी तय किया कि राजनयिक और सैन्य स्तर पर नियमित बातचीत और संपर्क बनाए रखे जाएंगे। भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व विदेश मंत्रालय में संयुक्त सचिव (पूर्वी एशिया) सुजीत घोष ने किया, जबकि चीनी पक्ष का नेतृत्व चीन के विदेश मंत्रालय के सीमा और समुद्री मामलों के विभाग की महानिदेशक होउ यानकी ने किया।
सुजीत घोष ने चीन के विदेश मंत्रालय के एशियाई मामलों के विभाग के निदेशक लियू जिनसोंग और सहायक विदेश मंत्री होंग लेई से भी मुलाकात की। भारत और चीन के रिश्ते 2020 में गलवान घाटी संघर्ष के बाद काफी तनावपूर्ण हो गए थे। इसके बाद पूर्वी लद्दाख में लंबे समय तक सैन्य गतिरोध बना रहा। हालांकि, कई दौर की सैन्य और राजनयिक बातचीत के बाद दोनों देशों ने कई विवादित इलाकों से सैनिकों को पीछे हटाया।
अक्टूबर 2024 में दोनों देशों ने देपसांग और डेमचोक जैसे आखिरी विवादित क्षेत्रों में भी सैनिकों की वापसी को लेकर समझौता किया था। इसके बाद प्रधानमंत्री Narendra Modi और चीन के राष्ट्रपति Xi Jinping के बीच कजान में मुलाकात हुई, जहां दोनों देशों ने रिश्तों को बेहतर बनाने पर सहमति जताई थी।





