
भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) ने एशियाई खेल 2026 के लिए चयन ट्रायल में पहलवान Vinesh Phogat को भाग लेने की अनुमति देने वाले दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
विवाद की जड़
भारतीय कुश्ती महासंघ का तर्क है कि दिल्ली उच्च न्यायालय का फैसला, जो Vinesh Phogat को चयन ट्रायल में शामिल होने की अनुमति देता है, महासंघ के मौजूदा चयन ढांचे को कमजोर करता है। महासंघ का मानना है कि इस तरह के हस्तक्षेप से उनकी चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता और प्रक्रियाओं पर असर पड़ता है।
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए, सुप्रीम कोर्ट में न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ इस मामले की सुनवाई करेगी। शुक्रवार, 28 मई, 2026 को होने वाली यह सुनवाई काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि इसका सीधा असर एशियाई खेलों की तैयारी और भारतीय कुश्ती टीम के चयन पर पड़ेगा।
पृष्ठभूमि और स्थिति
Vinesh Phogat एक शीर्ष एथलीट हैं, और उनकी भागीदारी को लेकर चल रहा यह कानूनी संघर्ष खेल जगत में चर्चा का विषय बना हुआ है। जैसा कि image_2.png में देखा जा सकता है, Vinesh Phogat इस मामले के केंद्र में हैं। इस कानूनी खींचतान के बीच, खेल प्रशंसक और अधिकारी सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले का इंतजार कर रहे हैं।
इस पूरे घटनाक्रम के दौरान, अन्य खबरों और विज्ञापनों में उत्तराखंड के ‘होम स्टे’ को बढ़ावा देने वाली तस्वीरें भी चर्चा में रहीं, जैसा कि image.png में दिखाया गया है, जो मुख्य खेल समाचारों के बीच एक अलग पहलू पेश करती हैं।
अब सभी की नजरें सुप्रीम कोर्ट की पीठ पर टिकी हैं कि वे महासंघ की दलीलों और पहलवान के हितों के बीच क्या संतुलन बनाते हैं।





