‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर साइबर ठगी, बुजुर्ग से 40 लाख से ज्यादा ऐंठे

मुंबई के भांडुप इलाके में रहने वाले एक रिटायर्ड बैंक मैनेजर साइबर ठगी का शिकार हो गए। ठगों ने खुद को पुलिस अधिकारी बताकर उन्हें करीब दो महीने तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखा और 40.9 लाख रुपये ठग लिए।
पुलिस के मुताबिक, पीड़ित राजेंद्र महाराष्ट्र स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक के पूर्व कर्मचारी हैं। मार्च महीने में उन्हें Signal ऐप पर एक वीडियो कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को दिल्ली एंटी-टेररिज्म स्क्वॉड का अधिकारी बताया। ठगों ने दावा किया कि राजेंद्र का नाम आतंकी मामले और मनी लॉन्ड्रिंग जैसी गंभीर गतिविधियों से जुड़ा हुआ है।
पीड़ित को डराने के लिए ठगों ने फर्जी दस्तावेज और नकली कोर्ट ऑर्डर भी दिखाए। उन्होंने कहा कि कर्नाटक में उनके नाम पर एक बैंक अकाउंट खोला गया है, जिसका इस्तेमाल करोड़ों रुपये के अवैध लेनदेन में हुआ है। साथ ही तुरंत गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई की धमकी भी दी गई।
ठगों ने राजेंद्र पर लगातार मानसिक दबाव बनाया। उन्हें घर में अकेले रहने, परिवार और दोस्तों से बात न करने और लगातार वीडियो कॉल पर रहने के लिए कहा गया। डर और दबाव में आकर उन्होंने कई बार में पैसे ट्रांसफर किए। शुरुआत में राजेंद्र ने छोटी रकम भेजी, लेकिन बाद में उन्होंने करीब 29 लाख रुपये के शेयर भी बेच दिए और पैसे ठगों के बताए खातों में ट्रांसफर कर दिए। इसके बाद ठगों ने जमानत के नाम पर 10 लाख रुपये और मांगे। यह रकम उनकी पत्नी ने लोन लेकर जुटाई।
पूरी रकम मिलने के बाद ठगों ने संपर्क तोड़ दिया। इसके बाद राजेंद्र को एहसास हुआ कि उनके साथ धोखाधड़ी हुई है। उन्होंने राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई और मुंबई साइबर सेल में मामला दर्ज कराया।
पुलिस मामले की जांच कर रही है और बैंक ट्रांजैक्शन व डिजिटल रिकॉर्ड्स की जांच की जा रही है। अधिकारियों ने लोगों को सलाह दी है कि कोई भी सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल पर जांच नहीं करती और न ही जमानत या केस बंद करने के नाम पर पैसे मांगती है।





