कश्मीर में आतंक की नई साजिश! अल-बद्र-हिजबुल गठबंधन को लेकर एजेंसियां सतर्क

भारतीय खुफिया एजेंसियों ने जम्मू-कश्मीर में आतंकी गतिविधियों को लेकर बड़ा अलर्ट जारी किया है। एजेंसियों के मुताबिक, लंबे समय से कमजोर पड़े आतंकी संगठन अल-बद्र ने घाटी में फिर से सक्रिय होने की कोशिश तेज कर दी है। इसके लिए संगठन हिजबुल मुजाहिदीन के साथ मिलकर नई रणनीति पर काम कर रहा है।
सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान में अल-बद्र के शीर्ष कमांडर हमजा बुरहान की हालिया मौत संगठन के लिए बड़ा झटका मानी जा रही है। हालांकि, सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि इस संगठन को कमजोर समझना खतरनाक हो सकता है। हाल ही में मिले इंटरसेप्ट्स से संकेत मिले हैं कि अल-बद्र और हिजबुल मुजाहिदीन घाटी में अपना नेटवर्क दोबारा खड़ा करने की कोशिश कर रहे हैं।
खुफिया अधिकारियों का कहना है कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के लिए इन दोनों संगठनों का साथ आना रणनीतिक रूप से फायदेमंद साबित हो सकता है। एजेंसियों के मुताबिक, इन संगठनों में कई ऐसे लोग शामिल हैं जो पहले पढ़ाई के बहाने पाकिस्तान गए थे, लेकिन वहां उन्हें आतंकी प्रशिक्षण देकर वापस घाटी में भेजा गया।
एक अधिकारी ने बताया कि अल-बद्र फिलहाल अकेले मजबूत स्थिति में नहीं है, क्योंकि उसके पास पहले जैसा कैडर और प्रभाव नहीं बचा है। लेकिन हिजबुल मुजाहिदीन के साथ गठजोड़ से उसे फिर से घाटी में पैर जमाने का मौका मिल सकता है। दोनों संगठन अब जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा के असंतुष्ट आतंकियों को अपने साथ जोड़ने की कोशिश में हैं।
एजेंसियों के मुताबिक, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जैश और लश्कर को बड़ा नुकसान हुआ था। इसी का फायदा उठाकर हिजबुल और अल-बद्र अपने संगठन को मजबूत करने की योजना बना रहे हैं। हालांकि, इससे आतंकी संगठनों के बीच वर्चस्व की लड़ाई बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है। फिलहाल ISI की प्राथमिकता घाटी में आतंकवादी गतिविधियों को दोबारा सक्रिय करना मानी जा रही है।
खुफिया सूत्रों के अनुसार, हमजा बुरहान युवाओं की भर्ती और प्रचार अभियान संभाल रहा था। वह पोस्टर वॉर के जरिए युवाओं को कट्टरपंथ की ओर आकर्षित करने की कोशिश कर रहा था। इसके तहत अनुच्छेद 370 हटाने और युवाओं के साथ कथित अन्याय जैसे मुद्दों को उछालने की रणनीति बनाई गई थी।
हाल ही में हमजा बुरहान के अंतिम संस्कार में अल-बद्र और हिजबुल मुजाहिदीन के कई नेताओं और कैडरों की मौजूदगी भी दोनों संगठनों की बढ़ती नजदीकियों का संकेत मानी जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, अल-बद्र प्रमुख जमीन बख्त और हिजबुल प्रमुख सैयद सलाहुद्दीन भी वहां मौजूद थे। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि स्थानीय नेटवर्क और घरेलू चेहरों के सहारे आतंकवाद को दोबारा खड़ा करने की यह कोशिश आने वाले समय में बड़ी चुनौती बन सकती है।





