बसंत पंचमी 2026: जानें देवी सरस्वती की संपूर्ण पूजा विधि और शुभ मुहूर्त

इंदौर, 23 जनवरी 2026 – माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि पर आज देशभर में बसंत पंचमी का पावन पर्व मनाया जा रहा है. यह दिन ज्ञान और कला की अधिष्ठात्री देवी सरस्वती के अवतरण दिवस के रूप में मनाया जाता है. हिंदू धर्म में इस तिथि को विशेष आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व प्राप्त है.
सनातन परंपरा में यह महोत्सव केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि प्रकृति के बदलते रूप का भी प्रतीक है. बसंत पंचमी वसंत ऋतु के आगमन की सूचना देती है, जब प्रकृति नवजीवन से भर उठती है.
विद्या और बुद्धि की प्राप्ति का दिन
काशी के प्रसिद्ध ज्योतिषी और धर्मशास्त्री पंडित अतुल मालवीय के अनुसार, इस दिन मां सरस्वती की उपासना से विद्या, बुद्धि, वाणी की पवित्रता, स्मरण शक्ति और कलाओं में निपुणता की प्राप्ति होती है.
आज के शुभ मुहूर्त
पूजा के लिए सर्वोत्तम समय प्रातः 6:43 बजे से दोपहर 12:15 बजे तक निर्धारित किया गया है. विशेष रूप से अभिजित मुहूर्त, जो सुबह 11:53 बजे से दोपहर 12:38 बजे तक रहेगा, अत्यंत शुभफलदायी माना जा रहा है.
पूजा की तैयारी और विधि
प्रारंभिक तैयारी
धर्मशास्त्र के अनुसार, उपासकों को ब्रह्ममुहूर्त में स्नान करना चाहिए. देवी सरस्वती को प्रिय पीले या श्वेत वस्त्र धारण करने की परंपरा है. पूजा स्थल को स्वच्छ कर ईशान कोण में एक चौकी पर पीला वस्त्र बिछाकर मां सरस्वती की प्रतिमा या चित्र स्थापित करना चाहिए.
संकल्प और आवाहन
पूजा का प्रारंभ दाहिने हाथ में जल, चावल और पुष्प लेकर संकल्प से होता है. इसके पश्चात विशेष ध्यान मंत्रों के माध्यम से देवी का आवाहन किया जाता है.
पूजन सामग्री और क्रम
उपासकों को मां सरस्वती को पुष्प, रोली, चंदन, चावल, धूप और दीपक अर्पित करना चाहिए. विशेष रूप से पुस्तकें, लेखन सामग्री और संगीत वाद्य यंत्रों को देवी के चरणों में रखकर प्रणाम करने की परंपरा है, जो ज्ञान और कला के प्रति समर्पण का प्रतीक है.
मंत्र जप और आरती
फल और नैवेद्य अर्पण के उपरांत सरस्वती स्तोत्र का पाठ या मंत्र जप करना चाहिए. धर्मशास्त्रियों के अनुसार, आरती के बिना यह पूजा अपूर्ण मानी जाती है, अतः अंत में आरती अवश्य करनी चाहिए.
पीले रंग का महत्व
इस पर्व पर पीले रंग का विशेष महत्व है. यह रंग ज्ञान, समृद्धि और उत्साह का प्रतीक माना जाता है. भक्तजन पीले वस्त्र धारण करते हैं और पीले रंग के व्यंजनों का प्रसाद तैयार करते हैं.
बसंत पंचमी का यह पावन पर्व विद्यार्थियों, कलाकारों और ज्ञान साधकों के लिए विशेष महत्व रखता है. देशभर के शिक्षण संस्थानों और मंदिरों में आज विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया जा रहा है.





