National Anti-Terrorism Day: 21 मई को क्यों मनाया जाता है यह दिन? जानें इतिहास और महत्व

National Anti-Terrorism Day 2026: भारत में हर साल 21 मई को राष्ट्रीय आतंकवाद विरोधी दिवस (National Anti-Terrorism Day) मनाया जाता है। यह दिन देश के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की पुण्यतिथि के रूप में मनाया जाता है, जिनकी 21 मई 1991 को तमिलनाडु के श्रीपेरंबुदूर में LTTE के आत्मघाती हमले में हत्या कर दी गई थी।
इस दिन का उद्देश्य देश में आतंकवाद और हिंसा के खिलाफ जागरूकता फैलाना और लोगों को शांति एवं एकता का संदेश देना है।
राष्ट्रीय आतंकवाद विरोधी दिवस का इतिहास
राजीव गांधी भारत के छठे प्रधानमंत्री थे और देश के सबसे युवा प्रधानमंत्री भी रहे। वे 1984 में अपनी मां इंदिरा गांधी की हत्या के बाद प्रधानमंत्री बने थे।
उनके कार्यकाल में 1987 में श्रीलंका में शांति स्थापित करने के लिए भारतीय शांति सेना भेजी गई थी। इस कदम की देश और विदेश में आलोचना हुई और इसके बाद LTTE के साथ तनाव बढ़ गया।
21 मई 1991 को चुनावी रैली के दौरान श्रीपेरंबुदूर में आत्मघाती हमले में उनकी हत्या कर दी गई।
इसके बाद वी.पी. सिंह सरकार ने आतंकवाद के खिलाफ जागरूकता फैलाने और राजीव गांधी की स्मृति में इस दिन को राष्ट्रीय आतंकवाद विरोधी दिवस घोषित किया।
राष्ट्रीय आतंकवाद विरोधी दिवस का महत्व
यह दिन केवल एक स्मृति दिवस नहीं है, बल्कि समाज को महत्वपूर्ण संदेश देता है:
- आतंकवाद और हिंसा के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूकता
- देश में शांति और एकता बनाए रखने का संदेश
- आतंकवाद के खिलाफ भारत की प्रतिबद्धता
- पीड़ितों को श्रद्धांजलि
इस दिन कैसे मनाया जाता है
देशभर के स्कूलों, कॉलेजों और सरकारी संस्थानों में इस दिन:
- वाद-विवाद प्रतियोगिताएं
- सेमिनार और चर्चाएं
- जागरूकता कार्यक्रम
- आतंकवाद विरोधी शपथ
आयोजित किए जाते हैं ताकि समाज में शांति और सुरक्षा का संदेश फैलाया जा सके।
राष्ट्रीय आतंकवाद विरोधी दिवस हमें यह याद दिलाता है कि आतंकवाद किसी भी रूप में समाज और मानवता के लिए खतरा है। यह दिन देश को एकता, शांति और सुरक्षा की दिशा में आगे बढ़ने का संदेश देता है।





