ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) ने गुरुवार को अमेरिका और इज़राइल को चेतावनी दी कि अगर कोई भी जमीनी ऑपरेशन ईरानी क्षेत्र में किया गया तो इसके गंभीर परिणाम होंगे। IRGC ने अपने बयान में अमेरिकी जनता को भी संबोधित करते हुए आरोप लगाया कि उन्हें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू सहित नेताओं द्वारा गुमराह किया जा रहा है।
IRGC ने कहा, “युद्ध की सच्चाई आपको अमेरिकी पेट्रोल पंपों, ईरान की सड़कों और तेल अवीव व हाइफा के आसमान में देखने को मिलेगी।”
ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 4 में ईरान की सटीक मिसाइल हमले की घोषणा
IRGC ने दावा किया कि अपने 81वें अभियान ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 4 में उसने इमाद, क़ियाम, खोरमशहर-4 और क़दर जैसी प्रिसिजन-गाइडेड मिसाइलों का उपयोग करके इज़राइल के 70 से अधिक लक्ष्यों को निशाना बनाया। इस अभियान में हाइफा, डिमोना और तेल अवीव के उत्तरी और दक्षिणी क्षेत्र शामिल थे। IRGC ने चेतावनी दी कि तेल अवीव और हाइफा जैसे शहरों में और भी तनाव बढ़ सकता है। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाई है।
IRGC ने यह भी बताया कि संघर्ष की शुरुआत से अब तक उसने अमेरिकी और इज़राइली लक्ष्यों पर 700 से अधिक मिसाइलें और 3,600 ड्रोन लॉन्च किए हैं। साथ ही, उनके एयर डिफेंस सिस्टम ने 200 से अधिक हमलों को नाकाम किया।
ईरानी विदेश मंत्री का कड़ा रुख, वार्ता और युद्धविराम से इनकार
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि तेहरान अपनी “प्रतिरोध नीति” जारी रखेगा और बिना भरोसेमंद गारंटी के किसी भी वार्ता या युद्धविराम को स्वीकार नहीं करेगा। एक टेलीविजन साक्षात्कार में अराघची ने कहा कि फिलहाल कोई बातचीत नहीं हो रही है और अंतरराष्ट्रीय आश्वासनों पर संदेह व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय नेताओं के प्रयासों के बावजूद ईरान का रुख “सिद्धांतपूर्ण और मजबूत” बना हुआ है।
संघर्ष में वृद्धि और कूटनीतिक प्रयासों की चुनौती
हाल की घटनाओं से यह संकेत मिलता है कि ईरान-इज़राइल-अमेरिका संघर्ष में और बढ़ोतरी हो रही है। दोनों पक्षों की सैन्य गतिविधियों और कड़े बयानबाजी के बीच कूटनीतिक प्रयास अब तक किसी ठोस समाधान तक नहीं पहुँच सके हैं।