नई दिल्ली की साइबर पुलिस का बड़ा खुलासा, 20 फर्जी कंपनियों से चल रहा था साइबर ठगी का नेटवर्क

नई दिल्ली की साइबर पुलिस ने ऑपरेशन साइ-हॉक के तहत एक बड़े साइबर फ्रॉड रैकेट का पर्दाफाश किया है। पुलिस के मुताबिक, यह गिरोह शेल कंपनियों और म्यूल बैंक अकाउंट्स के ज़रिए देशभर में लोगों से ठगे गए पैसों को इधर-उधर ट्रांसफर कर रहा था। जांच में सामने आया है कि ठगी की रकम घुमाने के लिए करीब 20 फर्जी कंपनियां बनाई गई थीं।
राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर दर्ज शिकायतों की जांच के दौरान पुलिस की नजर एक निजी बैंक के खाते पर पड़ी, जिसमें लगातार साइबर ठगी का पैसा जमा हो रहा था। यह खाता कुड्रेमुख ट्रेडिंग प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर था। शुरुआती जांच में ही साफ हो गया कि यह एक म्यूल अकाउंट है। इसके बाद साइबर पुलिस स्टेशन, नई दिल्ली ज़िले में FIR दर्ज कर मामले की जांच शुरू की गई।
जांच में पता चला कि कंपनी का डायरेक्टर राजेश खन्ना था, जो एक कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी था। पूछताछ में उसने बताया कि सुशील चावला और राजेश कुमार के कहने पर उसके नाम पर कंपनी और बैंक खाते खोले गए थे। असल में पैसों का पूरा कंट्रोल इन्हीं दोनों के पास था। इसी तरह अलग-अलग नामों पर कुल 20 शेल कंपनियां बनाकर ठगी की रकम को घुमाया जा रहा था।
इन कंपनियों से जुड़े बैंक खातों की जांच में देशभर से 176 साइबर फ्रॉड शिकायतें सामने आईं। शुरुआती अनुमान के मुताबिक, इन खातों के ज़रिए करीब 180 करोड़ रुपये का लेन-देन किया गया। पैसा कई लेयर में ट्रांसफर कर असली स्रोत छिपाने की कोशिश की जा रही थी।
मामले में एक चौंकाने वाला मोड़ तब आया, जब यह सामने आया कि जिन राजेश खन्ना के नाम पर कंपनियां खोली गई थीं, उनकी FIR दर्ज होने के बाद नोएडा के एक होटल में मौत हो गई। जांच से संकेत मिले हैं कि उसे सिर्फ एक मोहरे की तरह इस्तेमाल किया गया, जबकि पूरा नेटवर्क सुशील चावला और राजेश कुमार चला रहे थे।
शुरुआत में दोनों आरोपियों ने जांच में सहयोग किया, लेकिन बाद में सवालों से बचने लगे और नोटिस का जवाब देना बंद कर दिया। मोबाइल चैट्स और डिजिटल सबूतों के आधार पर पूरे नेटवर्क की पुष्टि होने के बाद पुलिस ने सुशील चावला और राजेश कुमार को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में यह भी सामने आया है कि इनके तार पश्चिम बंगाल में सक्रिय एक साइबर फ्रॉड नेटवर्क से जुड़े हो सकते हैं।
पुलिस ने आरोपियों से दो मोबाइल फोन और एक लैपटॉप जब्त किया है। सभी डिजिटल सबूत और बैंक खातों की जानकारी I4C को भेजी जा रही है, ताकि देशभर में चल रहे अन्य मामलों से इनके लिंक जोड़े जा सकें। फिलहाल पुलिस इस नेटवर्क से जुड़े बाकी आरोपियों की तलाश में जुटी हुई है।





