PM मोदी का UAE और Europe दौरा, Iran War के बीच एनर्जी सिक्योरिटी पर बड़ा फोकस

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से अपने पांच देशों के दौरे की शुरुआत की। यह दौरा नीदरलैंड, नॉर्वे, स्वीडन और इटली तक जाएगा। यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब Iran War के कारण वैश्विक ऊर्जा सप्लाई और तेल बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है।
Energy Security और Trade पर रहेगा फोकस
इस दौरे का सबसे बड़ा फोकस ऊर्जा सुरक्षा, टेक्नोलॉजी सहयोग और सप्लाई चेन को मजबूत करना है। खाड़ी क्षेत्र में शिपिंग रूट और Strait of Hormuz को लेकर बढ़ती चिंता ने तेल और गैस बाजार को प्रभावित किया है, जिससे भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर दबाव बढ़ा है।
भारत अब सिर्फ ऊर्जा आयातक देश नहीं बल्कि वैश्विक साझेदारी में विविधता लाने की रणनीति पर काम कर रहा है, ताकि किसी एक क्षेत्र पर निर्भरता कम हो सके।
UAE के साथ मजबूत हो रहे रिश्ते
UAE भारत का एक प्रमुख ऊर्जा साझेदार बना हुआ है। दोनों देशों के बीच व्यापार 100 बिलियन डॉलर से अधिक पहुंच चुका है। इस यात्रा में LPG सप्लाई और Strategic Petroleum Reserve से जुड़े समझौते होने की संभावना है, जिससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा और मजबूत होगी।
Europe में Technology और Manufacturing पर बड़ा फोकस
नीदरलैंड, स्वीडन और नॉर्वे जैसे देशों के साथ भारत का फोकस अब टेक्नोलॉजी, सेमीकंडक्टर और ग्रीन एनर्जी पर है। नीदरलैंड के साथ semiconductor और water management में सहयोग बढ़ाने की योजना है।
स्वीडन के साथ AI, 6G और clean energy जैसे क्षेत्रों में साझेदारी आगे बढ़ रही है, जबकि नॉर्वे के साथ maritime technology और renewable energy पर बड़ा सहयोग देखने को मिल रहा है।
Italy में Strategic Partnership को नई दिशा
इटली यात्रा के दौरान भारत-यूरोप संबंधों को और मजबूत करने पर जोर रहेगा। यहां infrastructure, defence और trade cooperation को लेकर नए समझौते संभव हैं। India-EU FTA के बाद यह दौरा और भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इस पूरे दौरे का संदेश साफ है कि भारत अब वैश्विक मंच पर एक बड़े power player के रूप में उभर रहा है। ऊर्जा संकट और geopolitical तनाव के बीच भारत अपने economic और strategic partnerships को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।





