IAS अधिकारी पद्मा जायसवाल सेवा से बर्खास्त, फंड गड़बड़ी मामले में कार्रवाई

नई दिल्ली: केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) ने 2003 बैच की AGMUT कैडर की IAS अधिकारी पद्मा जायसवाल को सरकारी सेवा से हटा दिया है। यह कार्रवाई लंबे समय से चल रही अनुशासनात्मक जांच के बाद की गई। पद्मा जायसवाल पर आरोप है कि उन्होंने अरुणाचल प्रदेश के वेस्ट कामेंग जिले में 2007-08 के दौरान डिप्टी कमिश्नर रहते हुए सरकारी फंड के दुरुपयोग और गड़बड़ी की थी।
बर्खास्तगी के समय वह दिल्ली सरकार के डिपार्टमेंट ऑफ एडमिनिस्ट्रेटिव रिफॉर्म्स में स्पेशल सेक्रेटरी के पद पर तैनात थीं। यह फैसला तब लिया गया जब भारत के राष्ट्रपति ने कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) की सिफारिश को मंजूरी दी। यह सिफारिश गृह मंत्रालय की सलाह के आधार पर भेजी गई थी।
मामले में अनुशासनात्मक कार्रवाई 2009-10 में शुरू हुई थी। जांच के दौरान संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) ने भी उन्हें सेवा से हटाने का समर्थन किया। इससे पहले, केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) ने यह मामला यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि AGMUT कैडर अधिकारियों पर कार्रवाई का अधिकार MHA के पास नहीं है।
हालांकि, दिल्ली हाई कोर्ट ने 1 अप्रैल 2026 को CAT के फैसले को पलट दिया और अनुशासनात्मक प्रक्रिया को दोबारा बहाल कर दिया। इसके बाद कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया। जांच में गंभीर कदाचार साबित होने के बाद पद्मा जायसवाल को तुरंत प्रभाव से सेवा से हटा दिया गया है। इस फैसले के बाद वह भविष्य में किसी भी सरकारी नौकरी और उससे जुड़े लाभों के लिए पात्र नहीं रहेंगी।
अपने करीब 20 साल के करियर में पद्मा जायसवाल ने अरुणाचल प्रदेश, दिल्ली, गोवा और पुडुचेरी में सेवाएं दी थीं।




