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NEET पेपर लीक विवाद के बीच गहराया मानसिक तनाव: मध्य प्रदेश की छात्रा ने की आत्महत्या

​मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट (NEET) को लेकर उपजे विवादों और अनियमितताओं की खबरों ने एक और होनहार छात्रा की जान ले ली है। मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले की रहने वाली 18 वर्षीय नीट एस्पिरेंट आकांक्षा चतुर्वेदी ने कथित तौर पर मानसिक तनाव और अवसाद के चलते नागपुर में आत्महत्या कर ली। इस घटना ने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और परीक्षा प्रणालियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

परीक्षा के बाद आई पेपर लीक की खबरों से लगा सदमा

​आकांक्षा नागपुर के एक कोचिंग संस्थान से नीट की तैयारी कर रही थी। उसके चाचा जगदीश प्रसाद चतुर्वेदी ने बताया कि परीक्षा देने के बाद आकांक्षा बेहद खुश और आश्वस्त थी। उसे उम्मीद थी कि वह 650 से अधिक अंक हासिल कर लेगी।
​हालांकि, परीक्षा के बाद जैसे ही मीडिया में कथित पेपर लीक और गड़बड़ियों की खबरें सामने आने लगीं, वह गहरे सदमे (Deep Shock) में चली गई। उसने बातचीत करना और खाना-पीना बेहद कम कर दिया था। गत 20 मई को वह अपने कमरे में मृत पाई गई।

सुसाइड नोट में बयां किया भावुक दर्द

​परिवार को मिले एक हस्तलिखित सुसाइड नोट ने आकांक्षा के मानसिक बोझ को उजागर किया है। नोट में उसने लिखा:
​”मम्मी और पापा, आपको भरोसा था कि आपकी बेटी कड़ी मेहनत करेगी और डॉक्टर बनेगी, लेकिन अब मुझमें दोबारा नीट परीक्षा देने की हिम्मत नहीं है। मैंने अपने पहले प्रयास में अच्छे अंक हासिल किए थे, लेकिन अब कोई गारंटी नहीं है कि मैं दोबारा अच्छा प्रदर्शन कर पाऊंगी। मुझे माफ कर दीजिए, मैंने सब कुछ बर्बाद कर दिया।”

कर्ज लेकर पिता कर रहे थे पढ़ाई का खर्च

​आकांक्षा मऊगंज के मगनिया गांव के एक गरीब किसान परिवार से ताल्लुक रखती थी। उसके पिता कृष्ण कुमार चौबे ने बेटी की कोचिंग फीस और घरेलू खर्चों को पूरा करने के लिए भारी वित्तीय जोखिम उठाए थे। उन्होंने खेती के साथ-साथ नागपुर में रसोइये (Cook) का काम भी किया। परिजनों ने बताया कि परिवार ने किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) के जरिए लगभग ₹3 लाख का कर्ज लिया था और रिश्तेदारों से भी आर्थिक मदद मांगी थी।
​पेपर लीक और धांधली के आरोपों के कारण कड़ी मेहनत करने वाले छात्रों में यह डर बैठ गया है कि उनकी प्रतिभा का कोई मूल्य नहीं रह जाएगा। इस दुखद घटना ने देश के शिक्षा तंत्र और परीक्षा आयोजकों की विश्वसनीयता को कटघरे में खड़ा कर दिया है।

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