सोनम वांगचुक की तबीयत बिगड़ी, 16 दिनों की भूख हड़ताल में घटा 8.2 किलो वजन
जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। परीक्षा में कथित अनियमितताओं के विरोध में जारी इस आंदोलन को विपक्षी दलों और छात्र संगठनों का समर्थन मिल रहा है।

नई दिल्ली: शिक्षाविद और प्रसिद्ध जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़ गई है। जंतर-मंतर पर जारी उनकी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल का आज 16वां दिन है। ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, इन 16 दिनों में वांगचुक का वजन 8.2 किलोग्राम घट गया है।
खतरनाक स्तर तक गिरा ब्लड शुगर
प्रदर्शनकारियों की ओर से जारी स्वास्थ्य अपडेट में बताया गया है कि सोनम वांगचुक का ब्लड शुगर लेवल गिरकर 67 mg/dL और ब्लड प्रेशर 107/70 mm Hg तक पहुंच गया है। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने सरकार से अपील की है कि वे इसे “अहंकार की लड़ाई” न बनाएं। उन्होंने कहा, “गलती मानना कमजोरी नहीं, बल्कि परिपक्वता और जवाबदेही का संकेत है।”
आंदोलन को मिल रहा व्यापक समर्थन
सोनम वांगचुक के इस प्रदर्शन को राजनीतिक दलों का समर्थन मिल रहा है। हाल ही में आम आदमी पार्टी (AAP) के एक प्रतिनिधिमंडल ने पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी के नेतृत्व में धरना स्थल का दौरा किया और आंदोलन के प्रति एकजुटता व्यक्त की। इसके अलावा, CPI(M) सांसद अमरा राम और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने भी वहां पहुंचकर प्रदर्शनकारियों की मांगों का समर्थन किया है।
20 जुलाई को संसद मार्च की योजना
यह प्रदर्शन मुख्य रूप से परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर किया जा रहा है। प्रदर्शनकारी छात्र और कार्यकर्ता 20 जुलाई को, मानसून सत्र के पहले दिन, जंतर-मंतर से संसद तक शांतिपूर्ण मार्च निकालने की योजना बना रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक यह आंदोलन जारी रहेगा।





