विरोध के बीच संचार साथी ऐप नंबर-1, गूगल जेमिनाई और ChatGPT को पछाड़ा

देशभर में विपक्षी दलों और आम लोगों के कड़े विरोध के बाद दूरसंचार विभाग (डीओटी) ने मोबाइल फोनों में संचार साथी ऐप पहले से इंस्टॉल करने के निर्देश वापस ले लिए। आदेश वापस लेने के बावजूद इस ऐप की चर्चा अचानक बढ़ गई और इसकी डाउनलोड संख्या में जबरदस्त उछाल दर्ज किया गया।
ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, संचार साथी ऐप 29 नवंबर तक भारत में सबसे अधिक डाउनलोड होने वाले ऐप्स की सूची में 127वें स्थान पर था। मात्र तीन दिनों में ऐप की रैंकिंग तेजी से बढ़ी और 2 दिसंबर को यह ऐपल ऐप स्टोर की डाउनलोड लिस्ट में गूगल जेमिनाई और चैटजीपीटी जैसे लोकप्रिय प्लेटफॉर्म को पीछे छोड़कर नंबर-1 पर पहुंच गया। दिलचस्प बात यह है कि 3 दिसंबर को सरकार ने प्री-इंस्टॉल निर्देश वापस ले दिए, फिर भी ऐप शीर्ष स्थान पर बना हुआ है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐप की बढ़ती लोकप्रियता का कारण गोपनीयता को लेकर उठी बहस है। प्राइवेसी से जुड़े संभावित खतरों ने लोगों में उत्सुकता पैदा की, जिसका सीधा असर डाउनलोड संख्या पर दिखा। इसी बीच, कुछ विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार के निर्देश के समर्थन में बीजेपी समर्थकों ने भी बड़ी संख्या में ऐप डाउनलोड किए, जिससे आंकड़ों में यह उछाल दिख रहा है। हालांकि विशेषज्ञों का अनुमान है कि यह तेजी फिलहाल अस्थायी है।
गूगल प्ले स्टोर पर भी संचार साथी ऐप की रैंकिंग में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई। 1 दिसंबर को जहां ऐप सभी कैटेगरी में 122वें स्थान पर था, वहीं दो दिनों के भीतर यह स्थान बढ़कर 3 दिसंबर को 15वें नंबर पर पहुंच गया। उत्पादकता श्रेणी में भी प्रदर्शन उल्लेखनीय रहा। 1 दिसंबर को यह 15वें स्थान पर था और 3 दिसंबर तक यह दूसरी पोजीशन पर पहुंच गया तथा लगातार शीर्ष स्लॉट में बना हुआ है।
संचार साथी ऐप को लेकर विवाद की शुरुआत 28 नवंबर को हुई थी, जब दूरसंचार विभाग ने मोबाइल फोन निर्माताओं को आदेश दिया था कि भारत में बेचे जाने वाले सभी नए हैंडसेट में यह ऐप प्री-इंस्टॉल हो, और मौजूदा उपकरणों में सॉफ्टवेयर अपडेट के जरिए इसे अनिवार्य रूप से जोड़ा जाए। विरोध के बाद विभाग ने आदेश वापस ले लिया, लेकिन ऐप अब सुर्खियों में है और डाउनलोड रैंकिंग में लगातार शीर्ष पर बना हुआ है।





