WhatsApp और Meta पर Texas का मुकदमा: क्या सुरक्षित नहीं है आपकी चैटिंग?

मेटा (Meta) के स्वामित्व वाली इंस्टेंट मैसेजिंग सर्विस ‘व्हाट्सएप’ (WhatsApp) एक बड़ी कानूनी मुश्किल में घिर गई है। अमेरिका के टेक्सास राज्य ने व्हाट्सएप और उसकी पैरेंट कंपनी मेटा पर मुकदमा दर्ज किया है। अटॉर्नी जनरल केन पैक्सटन के कार्यालय द्वारा दायर इस मुकदमे में गंभीर आरोप लगाए गए हैं कि कंपनी अपने उपयोगकर्ताओं को डेटा सुरक्षा और एन्क्रिप्शन के बारे में गुमराह कर रही है।
मुकदमे में क्या हैं मुख्य आरोप?
टेक्सास का आरोप है कि व्हाट्सएप अपने प्लेटफॉर्म को ‘सुरक्षित और एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड’ के रूप में विज्ञापित करता है, लेकिन वास्तव में यह उन वादों को पूरा नहीं करता है। मुकदमे में दावा किया गया है कि व्हाट्सएप और मेटा के पास उपयोगकर्ताओं के “लगभग सभी” निजी संदेशों तक पहुँच है। यह मुकदमा हैरिसन काउंटी कोर्ट में ‘टेक्सास डीसेप्टिव ट्रेड प्रैक्टिसेज एक्ट’ के तहत दायर किया गया है, जो राज्य का मुख्य उपभोक्ता संरक्षण कानून है।
कंपनी और अन्य दावों का रुख
मेटा के प्रवक्ता एंडी स्टोन ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर बयान जारी कर कहा है कि यह आरोप पूरी तरह से झूठे हैं और व्हाट्सएप के पास किसी भी व्यक्ति के एन्क्रिप्टेड संचार तक पहुँचने का कोई तरीका नहीं है।
यह पहला मामला नहीं है जब टेक्सास के अटॉर्नी जनरल ने किसी बड़ी टेक कंपनी के खिलाफ डेटा प्राइवेसी को लेकर कार्रवाई की हो। इससे पहले गूगल (Google) पर भी डेटा प्राइवेसी उल्लंघन का मुकदमा किया गया था, जिसके चलते गूगल ने मई 2025 में 1.375 बिलियन डॉलर का भारी जुर्माना भरने पर सहमति जताई थी।
वर्तमान में, यह मुकदमा तकनीक क्षेत्र में डेटा प्राइवेसी की पारदर्शिता पर बड़े सवाल खड़े करता है। हालांकि मेटा ने आरोपों का खंडन किया है, लेकिन कोर्ट की कार्यवाही के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि व्हाट्सएप की सुरक्षा दावों में कितनी सच्चाई है।





