AI + Agriculture = SDG सुपरहिट? स्मार्ट सिंचाई और मिट्टी एनालिटिक्स से संसाधनों की बर्बादी में भारी गिरावट

भारत में कृषि क्षेत्र में 2025 तक कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) ने क्रांतिकारी बदलाव लाया है। स्मार्ट सिंचाई और मिट्टी विश्लेषण जैसी तकनीकों की मदद से किसान अब पानी, उर्वरक और कीटनाशक का इस्तेमाल सही समय और सही मात्रा में कर पा रहे हैं। इससे लागत कम हुई है और संसाधनों की बर्बादी में उल्लेखनीय कमी आई है।
सागू बागू प्रोजेक्ट: किसानों की आय और उपज में वृद्धि
तेलंगाना के सागू बागू प्रोजेक्ट में 7,000 छोटे किसानों ने AI तकनीक अपनाई। परिणामस्वरूप, उनकी उपज में 21% तक की वृद्धि हुई और उर्वरक व कीटनाशकों का उपयोग 9% तक कम हुआ। इस पहल से किसानों की आय भी प्रति एकड़ लगभग ₹66,000 बढ़ी।
SDGs के लक्ष्यों पर AI का असर
SDGs रिपोर्ट के अनुसार AI आधारित कृषि का प्रभाव सीधे भारत के सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) पर दिख रहा है।
SDG 2 (Zero Hunger): फसल उत्पादन में वृद्धि से खाद्य सुरक्षा मजबूत हो रही है।
SDG 12 (Sustainable Agriculture): संसाधनों का कुशल उपयोग खेती को टिकाऊ बना रहा है।
SDG 13 (Climate Action): AI आधारित डेटा और पूर्वानुमान से किसान जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के लिए तैयार हैं।
किसानों के लिए AI टूल्स: ‘कृषि साथी’ और मोबाइल ऐप्स
Forbes रिपोर्ट के अनुसार AI आधारित मोबाइल ऐप्स और चैटबॉट, जैसे ‘कृषि साथी’, किसानों को स्थानीय भाषाओं में व्यक्तिगत सलाह प्रदान कर रहे हैं। इससे छोटे और सीमांत किसानों की निर्णय लेने की क्षमता बढ़ रही है और वे तकनीक के लाभ सीधे अनुभव कर रहे हैं।
सरकारी पहल और निवेश
भारत सरकार ने कृषि क्षेत्र में AI को बढ़ावा देने के लिए ₹500 करोड़ की निधि स्वीकृत की है। महाराष्ट्र में ‘महा एग्री-AI नीति’ के तहत रोबोटिक्स, ड्रोन और डिजिटल डेटा प्लेटफॉर्म का व्यापक इस्तेमाल किया जा रहा है। यह पहल किसानों की आय बढ़ाने और खेती को स्मार्ट और टिकाऊ बनाने के लिए महत्वपूर्ण कदम है।
AI के साथ सतत और समावेशी कृषि
AI का कृषि क्षेत्र में प्रवेश न केवल उत्पादन बढ़ा रहा है, बल्कि संसाधनों की बचत और पर्यावरणीय स्थिरता को भी बढ़ावा दे रहा है। सरकारी नीतियाँ, तकनीकी नवाचार और किसानों की भागीदारी मिलकर भारत में सतत और समावेशी कृषि विकास की दिशा में नई राह खोल रहे हैं।





