Byju’s Crisis: भारत की बड़ी EdTech कंपनी कैसे पहुंची संकट में? संस्थापक बायजू रवींद्रन को सिंगापुर कोर्ट से 6 महीने की जेल

एक समय भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम की सबसे बड़ी सफलता की कहानी मानी जाने वाली Byju’s आज कानूनी विवादों, कर्ज, निवेशकों के दबाव और दिवालियापन की कार्यवाही के बीच संघर्ष कर रही है। कभी 22 अरब डॉलर वैल्यूएशन तक पहुंचने वाली यह EdTech कंपनी अब अपने सबसे कठिन दौर से गुजर रही है।
ताजा घटनाक्रम में कंपनी के संस्थापक बायजू रवींद्रन को सिंगापुर की अदालत ने कथित तौर पर अदालत के आदेशों का पालन नहीं करने के मामले में 6 महीने की जेल की सजा सुनाई है। यह फैसला कंपनी से जुड़े वित्तीय दस्तावेजों और संपत्तियों के खुलासे से संबंधित कानूनी विवाद के बीच आया।
कैसे शुरू हुई Byju’s की सफलता की कहानी?
साल 2011 में Think & Learn Pvt Ltd के रूप में शुरू हुई Byju’s ने भारत में ऑनलाइन शिक्षा को नए स्तर पर पहुंचाया। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और डिजिटल लर्निंग मॉडल के कारण कंपनी तेजी से लोकप्रिय हुई।
कोविड-19 महामारी के दौरान ऑनलाइन पढ़ाई की मांग बढ़ने से कंपनी को बड़ा फायदा मिला। इस दौरान अंतरराष्ट्रीय निवेशकों ने भारी निवेश किया और Byju’s ने भारत के साथ-साथ विदेशों में भी तेजी से विस्तार शुरू किया।
कंपनी ने Aakash Educational Services, Great Learning और Epic जैसी कंपनियों का अधिग्रहण किया और लगभग 3 अरब डॉलर खर्च किए।
1.2 अरब डॉलर का लोन और यहीं से शुरू हुई मुश्किलें
साल 2021 में Byju’s ने विदेशी निवेशकों से 1.2 अरब डॉलर का टर्म लोन लिया। शुरुआत में इसे भारतीय स्टार्टअप सेक्टर की बड़ी उपलब्धि माना गया, लेकिन बाद में यही कर्ज कंपनी के लिए संकट का कारण बन गया।
इसके बाद कंपनी पर समय पर ऑडिट रिपोर्ट जमा न करने, वित्तीय पारदर्शिता की कमी और राजस्व आंकड़ों को लेकर सवाल उठने लगे।
जब वित्तीय रिपोर्ट सामने आई तो कंपनी का घाटा हजारों करोड़ रुपये तक पहुंच गया।
ऑडिटर के इस्तीफे ने बढ़ाई मुश्किल
स्थिति तब और गंभीर हो गई जब कंपनी के ऑडिटर Deloitte ने इस्तीफा दे दिया। बाद में अन्य ऑडिट संस्थाओं ने भी दूरी बना ली।
निवेशकों और कर्जदाताओं ने कंपनी की वित्तीय स्थिति और प्रबंधन पर सवाल उठाने शुरू कर दिए।
फंड ट्रांसफर और वैश्विक कानूनी लड़ाई
कर्जदाताओं ने आरोप लगाया कि कंपनी से जुड़े लगभग 533 मिलियन डॉलर की राशि के उपयोग और ट्रांसफर को लेकर पर्याप्त जानकारी साझा नहीं की गई।
इसके बाद अमेरिका, सिंगापुर और भारत में कई कानूनी मामले शुरू हुए। अमेरिकी अदालतों में कंपनी की विदेशी इकाइयों और संपत्तियों को लेकर विवाद बढ़ा।
इसी दौरान सिंगापुर में भी निवेश और शेयर संरचना से जुड़े मामलों में कानूनी कार्रवाई तेज हुई।
सिंगापुर कोर्ट का फैसला क्यों महत्वपूर्ण है?
रिपोर्ट्स के अनुसार, अदालत ने माना कि बायजू रवींद्रन ने कई बार जारी आदेशों का पूरी तरह पालन नहीं किया। इसी मामले में अदालत ने उन्हें छह महीने की सजा सुनाई और कुछ वित्तीय दस्तावेज जमा करने के निर्देश दिए।
हालांकि, यह मामला अभी भी कानूनी प्रक्रिया के अधीन है और आगे अपील या अन्य कार्रवाई संभव है।
भारत में दिवालियापन की कार्यवाही भी शुरू
भारत में भी Byju’s को बड़ा झटका तब लगा जब राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (NCLT) में कंपनी के खिलाफ दिवालियापन प्रक्रिया शुरू हुई।
यह मामला BCCI को भुगतान से जुड़े विवाद के बाद सामने आया।
इसके बाद कंपनी की प्रमुख संपत्तियों और नियंत्रण को लेकर विवाद और तेज हो गया।
Aakash Educational Services पर भी असर
Byju’s द्वारा खरीदी गई Aakash Educational Services अब कंपनी की सबसे महत्वपूर्ण संपत्तियों में गिनी जाती है।
लेकिन फंडिंग, हिस्सेदारी और नियंत्रण को लेकर यहां भी कानूनी विवाद सामने आए हैं।
कर्मचारियों और निवेशकों पर क्या असर पड़ा?
कंपनी के संकट का असर कर्मचारियों और निवेशकों पर भी दिखाई दिया।
- वेतन भुगतान में देरी
- कर्मचारियों की छंटनी
- निवेशकों की नाराजगी
- कंपनी वैल्यूएशन में भारी गिरावट
एक समय 22 अरब डॉलर वैल्यूएशन वाली कंपनी की वैल्यू कई रिपोर्ट्स में तेजी से घटती दिखाई गई।
क्या Byju’s वापसी कर पाएगी?
Byju’s का मामला अब सिर्फ एक कंपनी का संकट नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए एक बड़ा सबक माना जा रहा है।
तेजी से विस्तार, भारी कर्ज और वित्तीय अनुशासन की चुनौतियों के बीच कंपनी भविष्य की दिशा तय करने की कोशिश कर रही है।





