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‘भ्रष्ट’ से लेकर ‘चमचे’ तक, इन शब्दों पर लगा संसद में प्रतिबंधित

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नई दिल्ली: जुमलाजीवी से लेकर शर्मिंदगी तक, संसद ने मानसून सत्र से पहले शब्दों का एक नया सेट जारी किया, जिसे असंसदीय माना जाता है.

 

जुमलाजीवी, बाल बुद्धि, कोविड स्प्रेडर और स्नूपगेट जैसे शब्दों के साथ-साथ शर्म, गाली, विश्वासघात, भ्रष्ट, नाटक, पाखंड और अक्षम जैसे शब्दों का प्रयोग अब संसद में अपमानजनक माना जाएगा.

 

सोमवार से शुरू हो रहे मानसून सत्र से पहले आने वाली इस पुस्तिका में कहा गया है कि रिकॉर्ड अगर लोकसभा या राज्यसभा में इस्तेमाल किया जा रहा है, तो विनाश पुरुष, खालिस्तानी, अराजकतावादी, शकुनि, विनाश पुरुष, खालिस्तानी, तानाशाह, तानाशाह, तानाशाही, जयचंद और खून से खेती जैसे शब्दों और भावों को बाहर रखा जाएगा.

 

गाइडबुक के अनुसार, लोकसभा महासचिव ने दोहरा चरित्र, निकम्मा, नौटंकी, ढिंडोरा पीठना और बहरी सरकार जैसे शब्दों को भी अनुचित और आपत्तिजनक अभिव्यक्ति के रूप में सूचीबद्ध किया है.

 

टीएमसी सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने कहा कि मैं इन शब्दों का इस्तेमाल करूंगा, आप मुझे निलंबित कर दीजिए. उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा है, ‘कुछ ही दिनों में संसद का सत्र शुरू होने वाला है. सांसदों पर पाबंदी लगाने वाला आदेश जारी किया गया है. अब हमें संसद में भाषण देते समय इन बुनियादी शब्दों का उपयोग करने की अनुमति नहीं दी जाएगी. शर्म आनी चाहिए, दुर्व्यवहार किया, धोखा दिया, भ्रष्ट, पाखंड, अक्षम. मैं इन शब्दों का इस्तेमाल करूंगा. मुझे निलंबित कर दीजिए. लोकतंत्र के लिए लड़ाई लडूंगा.’

 

इनके अलावा टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने भी ट्वीट करते हुए लिखा है, ‘आपके कहने का यह मतलब है कि अब मैं लोकसभा में यह भी नहीं बता सकती कि हिंदुस्तानियों को एक अक्षम सरकार ने कैसे धोखा दिया है, जिन्हें अपनी हिपोक्रेसी पर शर्म आनी चाहिए?’

 

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