G7 Summit 2026: क्या है G7, क्यों अहम है यह शिखर सम्मेलन और भारत की क्या भूमिका है?

G7 Summit 2026: फ्रांस के खूबसूरत शहर एवियन-ले-बैंस (Evian-les-Bains) में 16 जून से G7 Summit 2026 की शुरुआत हो चुकी है। दुनिया की सात सबसे बड़ी विकसित अर्थव्यवस्थाओं के नेता दो दिनों तक वैश्विक सुरक्षा, आर्थिक चुनौतियों, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), यूक्रेन युद्ध और ईरान संकट जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा करेंगे।
इस साल का सम्मेलन कई मायनों में खास माना जा रहा है क्योंकि दुनिया एक साथ कई भू-राजनीतिक और आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे में G7 की बैठक पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं।
क्या है G7?
G7 दुनिया की सात विकसित अर्थव्यवस्थाओं का एक अनौपचारिक समूह है। इसके सदस्य हैं:
- अमेरिका
- ब्रिटेन
- कनाडा
- फ्रांस
- जर्मनी
- इटली
- जापान
इसके अलावा यूरोपीय संघ (EU) भी बैठकों में भाग लेता है, हालांकि वह G7 का औपचारिक सदस्य नहीं है।
यह संगठन किसी संधि या कानून के तहत नहीं बना है और इसका कोई स्थायी सचिवालय भी नहीं है। इसके बावजूद वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक फैसलों में इसकी बड़ी भूमिका मानी जाती है।
G7 की शुरुआत कैसे हुई?
G7 की स्थापना 1975 में हुई थी। 1973 के तेल संकट के बाद दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं ने आर्थिक चुनौतियों पर चर्चा और सहयोग के लिए एक मंच बनाने का फैसला किया।
समय के साथ इसका दायरा केवल आर्थिक मुद्दों तक सीमित नहीं रहा। अब यह सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन, वैश्विक संघर्ष, तकनीक और विकास जैसे विषयों पर भी चर्चा करता है।
आज G7 देशों की संयुक्त अर्थव्यवस्था 50 ट्रिलियन डॉलर से अधिक है, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था का लगभग आधा हिस्सा मानी जाती है।
भारत क्यों है खास?
हालांकि भारत G7 का सदस्य नहीं है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से भारत को लगातार विशेष आमंत्रित देश के रूप में बुलाया जा रहा है।
भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और वैश्विक दक्षिण (Global South) की आवाज के रूप में भी उभरा है। इसी वजह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस वर्ष भी सम्मेलन में आमंत्रित किया गया है।
भारत के अलावा दक्षिण कोरिया, ब्राजील और केन्या जैसे देशों को भी आमंत्रित किया गया है।
G7 Summit 2026 में किन मुद्दों पर होगी चर्चा?
1. यूक्रेन युद्ध
रूस-यूक्रेन युद्ध पांचवें वर्ष में प्रवेश कर चुका है। G7 देश यूक्रेन के समर्थन को लेकर अपनी एकजुटता दिखाना चाहते हैं। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की भी सम्मेलन में हिस्सा ले रहे हैं।
2. ईरान संकट
अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुए समझौते की रूपरेखा पर भी चर्चा होगी। खास तौर पर ऊर्जा आपूर्ति और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने जैसे मुद्दे एजेंडे में शामिल हैं।
3. वैश्विक आर्थिक असंतुलन
फ्रांस का मानना है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में असंतुलन बढ़ रहा है। चीन का बढ़ता निर्यात, अमेरिका की खपत आधारित अर्थव्यवस्था और यूरोप में कम निवेश जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।
4. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)
AI इस बार सम्मेलन का प्रमुख विषय है। OpenAI और अन्य बड़ी टेक कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों को भी चर्चा के लिए आमंत्रित किया गया है। AI के अवसरों, जोखिमों और ऑनलाइन सुरक्षा पर विचार-विमर्श होगा।
5. विकासशील देशों का कर्ज
कई विकासशील देश भारी कर्ज के बोझ से जूझ रहे हैं। G7 देश इस समस्या के समाधान पर भी चर्चा कर सकते हैं।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह सम्मेलन?
G7 Summit में लिए गए फैसले वैश्विक व्यापार, ऊर्जा, तकनीक, निवेश और सुरक्षा नीतियों को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे में भारत के लिए यह मंच अपनी प्राथमिकताओं को दुनिया के सामने रखने और प्रमुख देशों के साथ सहयोग बढ़ाने का अवसर है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विभिन्न देशों के नेताओं के साथ होने वाली मुलाकातों पर भी विशेष नजर रहेगी।
G7 Summit 2026 सिर्फ सात देशों की बैठक नहीं है, बल्कि यह ऐसा मंच है जहां दुनिया के सामने मौजूद बड़ी चुनौतियों पर चर्चा होती है। यूक्रेन युद्ध से लेकर AI तक और वैश्विक अर्थव्यवस्था से लेकर ऊर्जा सुरक्षा तक, इस सम्मेलन के निर्णयों का असर दुनिया भर के देशों पर पड़ सकता है। ऐसे में भारत की भागीदारी और प्रधानमंत्री मोदी की मौजूदगी इस सम्मेलन को भारतीय दृष्टिकोण से भी बेहद महत्वपूर्ण बनाती है।





