
भारत सरकार द्वारा आयात नियमों में ढील दिए जाने के बाद, नेपाल से भारत को होने वाला चाय का निर्यात मंगलवार से दोबारा शुरू हो गया है। पिछले दो महीनों से जारी इस गतिरोध के खत्म होने से नेपाल के चाय उत्पादकों ने राहत की सांस ली है, जो पूरी तरह भारतीय बाजार पर निर्भर हैं।
दो महीने बाद थमा गतिरोध
नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल (Shishir Khanal) ने जानकारी दी कि भारत द्वारा नियमों को आसान बनाने के बाद दो महीने से रुका हुआ चाय का व्यापार फिर से बहाल हो गया है। इससे पहले, 1 मई से इंडियन टी बोर्ड (Indian Tea Board) द्वारा सख्त नियम लागू किए जाने के कारण आयात ठप हो गया था, जिसके चलते नेपाली उत्पादकों को अपनी मैन्युफैक्चरिंग तक रोकनी पड़ी थी।
टेस्टिंग नियमों में बड़ा बदलाव
नेपाल टी एसोसिएशन के अध्यक्ष कमल मैनाली (Kamal Mainali) के अनुसार, नए संसोधित नियमों के तहत अब भारतीय अधिकारी नेपाल से आने वाली चाय के 100% कंसाइनमेंट की जांच नहीं करेंगे। इसकी जगह केवल 20 प्रतिशत सैंपल की ही टेस्टिंग की जाएगी। यानी अब हर 5 ट्रकों में से सिर्फ 1 ट्रक के सैंपल की जांच होगी और मानक सही पाए जाने पर एक्सपोर्ट परमिट जारी कर दिया जाएगा।
भारत बाजार का महत्व
नेपाल सालाना लगभग 7,838 टन ऑर्थोडॉक्स चाय (Orthodox Tea) का उत्पादन करता है, जिसका लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा अकेले भारत में निर्यात किया जाता है। केवल 11.4 प्रतिशत चाय ही अन्य देशों में जाती है। यही वजह है कि भारत का यह फैसला नेपाल के चाय उद्योग को डूबने से बचाने के लिए संजीवनी बूटी की तरह साबित हुआ है।





