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ईरान पर अमेरिका का लगातार 10वीं रात हमला, बढ़ा पश्चिम एशिया में तनाव

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। अमेरिकी सेना के सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने बताया कि उसने ईरान पर लगातार 10वीं रात सैन्य कार्रवाई की है। अमेरिका का कहना है कि इन हमलों का मकसद ईरान की उन सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना है, जिनका इस्तेमाल हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों पर हमलों के लिए किया जा रहा है।

CENTCOM के अनुसार, 20 जुलाई की रात किए गए हमलों में ईरानी सैन्य कमांड सेंटर, समुद्री ठिकाने, मिसाइल और ड्रोन लॉन्च साइट्स तथा एयर डिफेंस सिस्टम को निशाना बनाया गया। अमेरिकी सेना का कहना है कि इस कार्रवाई का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग को सुरक्षित बनाए रखना है।

अमेरिका ने यह भी दावा किया कि मई की शुरुआत से अब तक उसकी सेना ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य से करीब 900 व्यापारिक जहाजों और 45 करोड़ बैरल कच्चे तेल के सुरक्षित आवागमन में मदद की है। अमेरिका ने चेतावनी दी कि यदि नागरिक जहाजों पर हमला हुआ तो वह जवाबी कार्रवाई के लिए तैयार है।

वहीं, ईरान ने भी अमेरिकी कार्रवाई का जवाब देने का दावा किया है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) और ईरानी सेना ने कहा कि उन्होंने ‘ऑपरेशन नसर-2’ और ‘ऑपरेशन लाइटनिंग’ के तहत खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका से जुड़े कई ठिकानों पर हमले किए।

ईरान ने दावा किया कि उसने जॉर्डन के रुकबान क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकाने को निशाना बनाया, जहां कई अमेरिकी सैनिक मारे गए। इसके अलावा कुवैत के अली अल-सलेम एयर बेस में मौजूद MQ-9 ड्रोन हैंगर और अरिफजान बेस पर HIMARS मिसाइल सिस्टम पर भी हमला करने का दावा किया गया। ईरान ने बहरीन में अमेरिकी डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर और एक अमेरिकी मिसाइल रक्षा रडार सिस्टम को भी निशाना बनाने का दावा किया है।

हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

दोनों देशों के बीच तनाव पिछले महीने हुए 14 सूत्रीय समझौता ज्ञापन (MoU) के टूटने के बाद और बढ़ गया है। यह समझौता दोनों देशों के बीच तनाव कम करने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम समेत अन्य मुद्दों पर बातचीत आगे बढ़ाने के लिए किया गया था। समझौता विफल होने के बाद पश्चिम एशिया में एक बार फिर हालात तनावपूर्ण हो गए हैं।

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न्यूज़ मोबाइल ब्यूरो

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