
मंगलवार, 21 अप्रैल 2026 को विदेशी मुद्रा बाजार में भारतीय रुपये की शुरुआत कमजोरी के साथ हुई। अमेरिकी डॉलर की मजबूती और वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच शुरुआती कारोबार में रुपया 16 पैसे गिरकर 93.32 के स्तर पर आ गया।
बाजार का उतार-चढ़ाव
इंटरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार के आंकड़ों के अनुसार, रुपया 93.25 पर खुला और जल्द ही गिरकर 93.37 के स्तर तक चला गया। हालांकि, बाद के शुरुआती सौदों में यह 93.32 प्रति डॉलर पर कारोबार करता देखा गया। पिछले कारोबारी सत्र की तुलना में यह एक महत्वपूर्ण गिरावट है।
गिरावट के प्रमुख कारण
रुपये की इस कमजोरी के पीछे विशेषज्ञों ने कुछ मुख्य कारण बताए हैं:
1. मजबूत अमेरिकी डॉलर: अंतरराष्ट्रीय बाजार में अमेरिकी मुद्रा (Greenback) की मजबूती ने भारतीय मुद्रा पर दबाव बनाया है।
2. पश्चिम एशिया में तनाव: वेस्ट एशिया शांति समझौते (West Asia peace agreement) को लेकर बनी अनिश्चितता ने निवेशकों को चिंतित कर दिया है, जिससे वैश्विक स्तर पर जोखिम वाली मुद्राओं से निवेशक पीछे हट रहे हैं।
3. RBI के नए नियम: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा मुद्रा पर सट्टा दांव (speculative bets) से जुड़े प्रतिबंधों में ढील देने के निर्णय ने भी घरेलू मुद्रा की चाल को प्रभावित किया है।
राहत के संकेत
हालांकि रुपये पर दबाव है, लेकिन कुछ सकारात्मक कारकों ने इसे बड़ी गिरावट से बचाने में मदद की है। भारतीय शेयर बाजार में तेजी और विदेशी कोषों (foreign funds) के निरंतर प्रवाह ने स्थानीय मुद्रा को निचले स्तर पर सहारा दिया है। फॉरेक्स ट्रेडर्स का मानना है कि यदि घरेलू इक्विटी मार्केट में मजबूती बनी रहती है, तो रुपये में सुधार की संभावना देखी जा सकती है।





