फैक्ट चेक: भारतीय सैनिक से दुर्व्यवहार करते हुए लोगों का यह वीडियो साल 2014 से पहले का नहीं, जानें पूरा सच

फैक्ट चेक: भारतीय सैनिकों से दुर्व्यवहार करते हुए लोगों का यह वीडियो साल 2014 से पहले का नहीं, जानें पूरा सच
सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो कुछ लोग भारतीय सैनिकों के साथ बदसलूकी करते हुए नजर आ रहे हैं। इसी वीडियो को सोशल मीडिया पर शेयर कर दावा किया जा रहा है कि भारत में 2014 के पहले एक सैनिक की ऐसी हालत थी कि उनसे इस तरह बदसलूकी की जाती थी।
फेसबुक के वायरल वीडियो को शेयर कर हिंदी भाषा के कैप्शन में लिखा गया है कि “2014 के पहले ये हालात थे हमारी सेना के, शर्म आनी चाहिए मंदबुद्धि युवराज के khan gresi चमचों को क्या हालत कर दी थी वोट की राजनीति ने सेना की।”

फेसबुक के वायरल पोस्ट का लिंक यहाँ देखें।
फैक्ट चेक :
न्यूज़मोबाइल की पड़ताल में हमने जाना कि वायरल वीडियो साल 2014 के पहले का नहीं है।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो की सत्यता जानने के लिए हमने पड़ताल की। सबसे पहले हमने वीडियो को कुछ कीफ्रेम्स में तोड़ा और फिर गूगल लेंस के माध्यम से खोजना शुरू किया। खोज के दौरान हमें वायरल वीडियो Jammu Links News नामक यूट्यूब चैनल पर मिला जिसे अप्रैल 12, 2017 को अपलोड किया गया था।
उपरोक्त प्राप्त वीडियो में जानकारी दी गयी है कि वायरल वीडियो साल 2017 के दौरान मतदान करने के बाद मतदान केंद्र से लौट रहे जवान को भीड़ में शामिल कुछ युवकों द्वारा बदसलूकी की जाती है, जो नारे लगाते हुए सैनिकों के साथ चल रहे थे। कैप्शन में दी गयी जानकारी के मुताबिक सैनिक उन ईवीएम या इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों को सुरक्षित रखने जा रहे थे जिन्हें वह और उसके साथी मतदान केंद्र से ले जा रहे थे।
उपरोक्त मिली जानकारी के मुताबिक वायरल वीडियो वाली घटना साल 2017 के दौरान की है। इसी बात की पुष्टि के लिए हमने गूगल पर बारीकी से खोजना शुरू किया। खोज के दौरान हमें वायरल वीडियो की जानकारी आज तक के आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर मिला। जिसे अप्रैल 13, 2017 के दौरान अपलोड किया गया था। यहाँ बताया गया है कि
खोज के दौरान हमें हिंदुस्तान टाइम्स की वेबसाइट पर अप्रैल 14, 2017 को प्रकाशित रिपोर्ट में यह वीडियो मिला। जहाँ बताया गया था कि यह घटना अप्रैल 09, 2017 को मध्य कश्मीर के बडगाम ज़िले के चादूरा विधानसभा क्षेत्र के क्रालपोरा इलाके में मतदान ड्यूटी पर जा रहे सीआरपीएफ जवानों के साथ हुई थी। जिसके बाद सीआरपीएफ की शिकायत पर जम्मू-कश्मीर पुलिस ने एक मामला दर्ज किया था।

वहीं, रिपोर्ट में सीआरपीएफ के तत्कालीन इंस्पेक्टर जनरल रविदीप सिंह शाही का बयान भी मौजूद है, जिसमें उन्होंने कहा था कि “जांच के दौरान हमने पाया कि वीडियो असली है। हमने सभी तथ्यों को एकत्र किया है और आधिकारिक रूप से चादूरा पुलिस स्टेशन को सूचित किया है। जिन्होंने हमारे जवानों के साथ ऐसा किया है उनके खिलाफ हम कानूनी कार्रवाई करेंगे। हम इस मामले को सख्ती से आगे बढ़ाएंगे”
पड़ताल के दौरान मिले तथ्यों से हमने जाना कि वायरल वीडियो साल 2014 के दौरान का नहीं बल्कि साल 2017 के दौरान का है, जिसे भ्रामक दावे के साथ शेयर किया जा रहा है।





