यूरोप में क्यों ‘पिघल’ रही हैं सड़कें? जानिए क्यों रिकॉर्ड तोड़ हीटवेव बन गई है दुनिया के लिए चेतावनी

यूरोप इस समय भीषण गर्मी की चपेट में है। कई देशों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है। हालात ऐसे हैं कि कहीं सड़कें गर्मी से नरम पड़ रही हैं, कहीं रेलवे ट्रैक मुड़ रहे हैं, तो कई इलाकों में जंगलों में भीषण आग फैल चुकी है। सवाल यह है कि आखिर यूरोप में ऐसा क्या हो रहा है?
यूरोप में क्यों बढ़ रही है इतनी भीषण गर्मी?
फ्रांस, स्पेन, इटली, जर्मनी और यूरोप के कई अन्य हिस्से रिकॉर्ड तोड़ हीटवेव का सामना कर रहे हैं। कई शहरों में रेड हीट अलर्ट जारी किया गया है, स्कूल बंद किए गए हैं और लोगों को बिना ज़रूरी काम घर से बाहर न निकलने की सलाह दी जा रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह केवल एक सामान्य गर्मी नहीं है, बल्कि कई वैज्ञानिक कारणों का परिणाम है।
पहला कारण: जलवायु परिवर्तन (Climate Change)
वैज्ञानिकों के अनुसार, यूरोप में बढ़ती गर्मी की सबसे बड़ी वजह जलवायु परिवर्तन है।
दशकों से कोयला, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस जैसे जीवाश्म ईंधनों के इस्तेमाल से बड़ी मात्रा में ग्रीनहाउस गैसें वातावरण में जमा हो रही हैं। ये गैसें पृथ्वी से निकलने वाली गर्मी को रोक लेती हैं, जिससे धरती का औसत तापमान लगातार बढ़ रहा है।
इसी वजह से अब हीटवेव पहले की तुलना में ज्यादा बार, ज्यादा लंबे समय तक और अधिक तीव्र रूप में देखने को मिल रही हैं।
दूसरा कारण: हीट डोम (Heat Dome)
इस समय यूरोप के ऊपर हीट डोम नाम की एक मौसमीय स्थिति बनी हुई है।
हीट डोम को ऐसे समझिए जैसे किसी बर्तन पर ढक्कन रख दिया जाए। सामान्य परिस्थितियों में गर्म हवा ऊपर उठकर निकल जाती है, लेकिन हीट डोम उसे बाहर नहीं जाने देता। नतीजतन गर्म हवा जमीन के पास ही फंसी रहती है और तापमान लगातार बढ़ता जाता है।
तीसरा कारण: सहारा रेगिस्तान से आ रही गर्म हवा
यूरोप की स्थिति को और गंभीर बना रही है सहारा रेगिस्तान से आने वाली बेहद गर्म और शुष्क हवा।
जब यह गर्म हवा हीट डोम के नीचे फंसी गर्म हवा से मिलती है, तो तापमान और तेजी से बढ़ जाता है। इसी कारण फ्रांस, स्पेन और इटली जैसे देशों में रिकॉर्ड स्तर की गर्मी दर्ज की जा रही है।
भीषण गर्मी का असर सिर्फ तापमान तक सीमित नहीं
इस हीटवेव का असर केवल लोगों को गर्मी महसूस होने तक सीमित नहीं है।
कई जगहों पर अत्यधिक गर्मी के कारण सड़कों की सतह नरम पड़ रही है। स्टील से बने रेलवे ट्रैक गर्म होकर फैल रहे हैं, जिससे उनके मुड़ने का खतरा बढ़ जाता है। सूखे जंगलों में आग तेजी से फैल रही है और अस्पतालों में हीट स्ट्रोक तथा गर्मी से जुड़ी बीमारियों के मरीजों की संख्या बढ़ रही है।
फ्रांस के स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, हालिया हीटवेव के दौरान 1,000 से अधिक अतिरिक्त (Excess) मौतें दर्ज की गई हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह आंकड़ा बताता है कि अत्यधिक गर्मी भी बाढ़, तूफान या भूकंप की तरह जानलेवा साबित हो सकती है।
क्या भविष्य में ऐसी हीटवेव और बढ़ेंगी?
जलवायु वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन इसी तरह जारी रहा, तो भविष्य में यूरोप ही नहीं बल्कि दुनिया के कई हिस्सों में ऐसी भीषण हीटवेव अधिक बार देखने को मिल सकती हैं।
यूरोप इस समय केवल रिकॉर्ड तापमान नहीं झेल रहा, बल्कि पूरी दुनिया को यह चेतावनी भी दे रहा है कि जलवायु परिवर्तन का असर अब भविष्य की नहीं, वर्तमान की वास्तविकता बन चुका है।
आज यह संकट यूरोप में है, लेकिन अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले वर्षों में दुनिया का कोई भी देश इससे अछूता नहीं रह सकता।





