AI साइंस-टेक्नोलॉजी

भारत के युवाओं की रोजगार क्षमता 56% के पार, एआई स्किल्स बनीं नई जरूरत

दुनिया में काम करने का तरीका तेज़ी से बदल रहा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई और नई तकनीकों के बढ़ते इस्तेमाल ने आज के युवाओं के लिए डिजिटल स्किल सीखना अनिवार्य बना दिया है। इसके साथ ही गिग इकॉनमी यानी प्रोजेक्ट आधारित काम का चलन भी बढ़ रहा है, जिससे स्थायी नौकरी की पारंपरिक सोच धीरे-धीरे बदल रही है। भारत का युवा वर्ग भी इस बदलाव को समझ रहा है और खुद को नए दौर की जरूरतों के हिसाब से तैयार कर रहा है।

इसी बदलाव को दर्शाती इंडिया स्किल्स रिपोर्ट 2026 सामने आई है, जिसे ETS, CII, AICTE, AIU और Taggd ने मिलकर जारी किया है। रिपोर्ट बताती है कि भारत में युवाओं की रोजगार क्षमता बढ़कर 56.35 प्रतिशत हो गई है, जो पिछले साल 54.81 प्रतिशत थी। इसका मतलब है कि अब आधे से ज्यादा युवा Graduate Employability Test (GET) में 60 प्रतिशत से अधिक स्कोर कर रहे हैं, जिससे स्पष्ट होता है कि भारत का युवा अब पहले से ज्यादा नौकरी-तैयार है।

इस अध्ययन में देशभर के 28 राज्यों और 9 केंद्र शासित प्रदेशों से 7 लाख से अधिक छात्रों ने भाग लिया। उनकी नौकरी-तैयारी का आकलन GET के माध्यम से किया गया, जबकि 15 अलग-अलग उद्योगों के एक हजार से अधिक नियोक्ताओं से यह समझने की कोशिश की गई कि वे किस तरह की स्किल चाहते हैं। यह रिपोर्ट साबित करती है कि भारत का युवा खुद को उद्योग की मांगों के अनुरूप ढालने के लिए सक्रिय रूप से प्रयास कर रहा है।

छात्रों की रोजगार क्षमता में सबसे आगे कंप्यूटर साइंस और आईटी के विद्यार्थी हैं, जिनकी नौकरी-तैयारी 80 प्रतिशत और 78 प्रतिशत तक पहुंच गई है। एआई, डेटा एनालिटिक्स और ऑटोमेशन जैसी तकनीकों की बढ़ती मांग इनके लिए एक बड़ा अवसर लेकर आई है। इंजीनियरिंग यानी BE/BTech की रोजगार क्षमता भी लगभग 70 प्रतिशत पर स्थिर है, जिससे यह साफ है कि तकनीकी क्षेत्र अब भी एक मजबूत और सुरक्षित करियर विकल्प बना हुआ है। कॉमर्स छात्रों ने भी उल्लेखनीय प्रगति की है और उनकी रोजगार क्षमता बढ़कर 62.81 प्रतिशत हो गई है, जिसका बड़ा कारण BFSI और फिनटेक सेक्टर में तेजी से हो रही भर्तियाँ हैं। साइंस और आर्ट्स के छात्र भी तेजी से आगे बढ़ रहे हैं और इनके लिए भी उद्योग में अवसर बढ़ रहे हैं।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि आज के उद्योग केवल तकनीकी प्रतिभा ही नहीं ढूंढ रहे, बल्कि ऐसे युवा चाहते हैं जो डिजिटल रूप से समझदार हों, सोचने-समझने की क्षमता रखते हों, समस्याओं का समाधान कर सकें और बदलावों के साथ खुद को जल्दी ढाल सकें। कम्युनिकेशन और टीमवर्क जैसी स्किल भी अब तकनीकी स्किल जितनी ही महत्वपूर्ण हो गई हैं। कंपनियों का मानना है कि तकनीक सिखाई जा सकती है, लेकिन सीखने की क्षमता और अनुकूलनशीलता व्यक्ति अपने साथ लेकर आता है।

इसके साथ ही काम करने का मॉडल भी बदल रहा है। गिग इकॉनमी अब केवल अस्थाई विकल्प नहीं, बल्कि युवाओं की पसंद बनती जा रही है। लोग अब लचीले काम के घंटे, एक से अधिक प्रोजेक्ट पर काम करने का मौका और अपनी पसंद का काम चुनने की आज़ादी को महत्व दे रहे हैं। इससे गिग वर्कफोर्स तेजी से बढ़ रहा है और कंपनियां भी इसे तेजी से अपना रही हैं।

कुल मिलाकर, यह रिपोर्ट बताती है कि भारत का युवा वर्ग न केवल तकनीक और एआई को अपनाकर अपनी क्षमता बढ़ा रहा है, बल्कि काम की नई दुनिया में खुद को लगातार बेहतर बना रहा है। भारत की रोजगार कहानी अब सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं रही, बल्कि एक ऐसे दौर में प्रवेश कर चुकी है जहां युवा खुद को भविष्य के लिए तैयार करने में सबसे आगे हैं।

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न्यूज़ मोबाइल ब्यूरो

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