दिल्ली हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: 15 साल की रेप पीड़िता को 28 हफ्ते का गर्भ गिराने की मिली इजाजत

दिल्ली हाई कोर्ट ने एक अत्यंत संवेदनशील मामले में 15 वर्षीय रेप पीड़िता को उसके 28 सप्ताह के गर्भ को चिकित्सकीय रूप से समाप्त (Abortion) करने की अनुमति दे दी है। यह आदेश 24 जून, 2026 को जस्टिस मिनी पुष्करणा की वेकेशन बेंच द्वारा पारित किया गया।
मानसिक आघात को देखते हुए लिया गया फैसला
याचिकाकर्ता ने अपने पिता के माध्यम से कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। कोर्ट ने माना कि हालांकि मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (MTP) एक्ट के तहत 24 सप्ताह से अधिक के गर्भ को गिराने का सामान्य प्रावधान नहीं है, लेकिन इस मामले में नाबालिग लड़की पर हुए मानसिक आघात (Grave Mental Injury) को देखते हुए असाधारण अधिकार का उपयोग करना जरूरी था।
AIIMS दिल्ली को DNA सुरक्षित रखने के निर्देश
कोर्ट ने एम्स (AIIMS), नई दिल्ली को निर्देश दिया है कि प्रक्रिया के दौरान भ्रूण के टिशू (Tissue) को सुरक्षित रखा जाए, ताकि आगामी आपराधिक मामले में डीएनए परीक्षण (DNA Testing) किया जा सके। एम्स की मेडिकल बोर्ड रिपोर्ट ने भी पुष्टि की है कि पीड़िता शारीरिक रूप से इस प्रक्रिया के लिए फिट है और गर्भावस्था जारी रखने से उस पर प्रतिकूल मनोवैज्ञानिक प्रभाव पड़ने की संभावना है।
बच्चे के जीवित पैदा होने पर क्या होगी प्रक्रिया?
अदालत ने यह स्पष्ट किया है कि यदि गर्भपात के दौरान बच्चा जीवित पैदा होता है, तो एम्स और राज्य के अधिकारी उसे पूरी चिकित्सा सहायता और इनक्यूबेटर की सुविधा प्रदान करेंगे। आगे कहा गया है:
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बाल कल्याण समिति (CWC) को इस मामले की जानकारी दी जाएगी।
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नाबालिग और उसके पिता की इच्छा पर बच्चे को कानूनी प्रक्रिया के तहत गोद (Adoption) देने की व्यवस्था की जाएगी।
दिल्ली सरकार उठाएगी सारा खर्च
दिल्ली सरकार ने कोर्ट के समक्ष इस मामले में कोई आपत्ति नहीं जताई। कोर्ट ने आदेश दिया कि गर्भपात की प्रक्रिया और अस्पताल में पीड़िता के रहने का पूरा खर्च दिल्ली सरकार द्वारा वहन किया जाएगा।





