ट्रंप ने बनाई नई टेक काउंसिल, जुकरबर्ग-हुआंग समेत बड़े नाम शामिल

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में सलाह देने के लिए एक नई परिषद का गठन किया है। इस परिषद का नाम प्रेसिडेंट्स काउंसिल ऑफ एडवाइजर्स ऑन साइंस एंड टेक्नोलॉजी (PCAST) है, जिसे एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर के जरिए बनाया गया है।
टेक दिग्गजों को मिली बड़ी जिम्मेदारी
ट्रंप ने इस काउंसिल के पहले सदस्यों के रूप में बड़े टेक उद्योगपतियों को शामिल किया है। इनमें मार्क जुकरबर्ग, लैरी एलिसन और जेंसन हुआंग जैसे नाम शामिल हैं। व्हाइट हाउस के अनुसार, इस काउंसिल के को-चेयर डेविड सैक्स और माइकल क्राट्सियोस होंगे।
24 सदस्यों तक हो सकती है टीम
इस काउंसिल में कुल 24 सदस्य तक शामिल किए जा सकते हैं और आने वाले समय में और लोगों की नियुक्ति की जाएगी। इसका मकसद अमेरिका को विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में मजबूत बनाना और राष्ट्रपति को इस बारे में सलाह देना है।
AI और नई तकनीकों पर रहेगा फोकस
व्हाइट हाउस ने बताया कि यह काउंसिल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और अन्य नई तकनीकों से जुड़े अवसरों और चुनौतियों पर काम करेगी। खासतौर पर यह देखा जाएगा कि इन तकनीकों का असर अमेरिका के रोजगार और वर्कफोर्स पर कैसे पड़ रहा है।
इन बड़े नामों को किया गया शामिल
इस काउंसिल में सर्गेई ब्रिन, माइकल डेल, लिसा सु, सफ्रा कैट्ज़ और अन्य बड़े उद्योगपति व टेक एक्सपर्ट्स शामिल हैं। दिलचस्प बात यह है कि इस सूची में ज्यादातर लोग टेक कंपनियों के अधिकारी या निवेशक हैं, जबकि वैज्ञानिक और शोधकर्ता बहुत कम हैं।
ओबामा सरकार से अलग रुख
यह काउंसिल पहले की बराक ओबामा सरकार से अलग नजर आती है। उस समय इस तरह की सलाहकार समिति में ज्यादातर वैज्ञानिक और शोधकर्ता शामिल होते थे, जबकि अब इसमें बिजनेस लीडर्स की संख्या ज्यादा है।
विवादों में रहे कुछ नाम
काउंसिल में शामिल कुछ लोग पहले कर्मचारियों से जुड़े विवादों को लेकर भी चर्चा में रहे हैं। जैसे मार्क जुकरबर्ग और लैरी एलिसन पर बड़े पैमाने पर छंटनी करने के आरोप लगे हैं। वहीं, सर्गेई ब्रिन से जुड़ी खबरों में कर्मचारियों से ज्यादा घंटे काम करवाने की बात सामने आई थी।
कुल मिलाकर, यह नई काउंसिल अमेरिका में तकनीक और इनोवेशन को आगे बढ़ाने के लिए बनाई गई है, लेकिन इसमें शामिल सदस्यों को लेकर बहस भी शुरू हो गई है।





