स्वास्थ्य कारणों से ISS से चार अंतरिक्ष यात्रियों की समय से पहले वापसी, प्रशांत महासागर में सुरक्षित लैंडिंग

अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर मौजूद चार अंतरिक्ष यात्री गुरुवार को सुरक्षित रूप से पृथ्वी पर लौट आए। नासा के मुताबिक, यह ISS के इतिहास में पहली बार हुआ है जब किसी मेडिकल कारण से अंतरिक्ष यात्रियों को समय से पहले वापस लाया गया।
नासा की वीडियो फुटेज में दिखाया गया कि स्पेसएक्स का कैप्सूल प्रशांत महासागर में सैन डिएगो के तट के पास भारतीय समयानुसार सुबह 12:41 बजे (0841 GMT) समुद्र में उतरा। इस कैप्सूल में अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री माइक फिन्के और ज़ेना कार्डमैन, रूसी कॉस्मोनॉट ओलेग प्लाटोनोव और जापानी अंतरिक्ष यात्री किमिया युई सवार थे।
नासा ने बताया कि चालक दल के एक सदस्य की तबीयत से जुड़ी समस्या के कारण मिशन को छोटा करने का फैसला लिया गया। हालांकि एजेंसी ने स्वास्थ्य समस्या का विवरण साझा नहीं किया, लेकिन यह साफ किया कि स्थिति आपातकालीन नहीं थी। नासा अधिकारी रॉब नावियास ने कहा कि प्रभावित अंतरिक्ष यात्री की हालत स्थिर है और वह सुरक्षित है।
स्पेसएक्स क्रू-11 मिशन के पायलट माइक फिन्के ने सोशल मीडिया पर कहा, “सबसे पहले यह कहना जरूरी है कि हम सभी ठीक हैं। सभी सुरक्षित हैं और अच्छी देखभाल में हैं। यह फैसला इसलिए लिया गया ताकि जमीन पर बेहतर और विस्तृत मेडिकल जांच की जा सके।”
चारों अंतरिक्ष यात्री अगस्त की शुरुआत में ISS पहुंचे थे और फरवरी के मध्य तक स्टेशन पर रहने की योजना थी। लेकिन नासा के मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी जेम्स पोल्क ने कहा कि संभावित जोखिम और बीमारी को लेकर स्पष्ट निदान न होने के कारण उन्हें पहले वापस लाने का निर्णय लिया गया।
इस बीच, अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री क्रिस विलियम्स और रूसी कॉस्मोनॉट सर्गेई कुद-स्वेर्चकोव तथा सर्गेई मिकाएव ISS पर ही बने हुए हैं। वे नवंबर में रूसी सोयूज यान के जरिए स्टेशन पहुंचे थे।
ISS पर नासा और रूस की अंतरिक्ष एजेंसी रोस्कोस्मोस मिलकर काम करती हैं। दोनों देश एक-दूसरे के अंतरिक्ष यात्रियों को स्टेशन तक लाने और वापस ले जाने की जिम्मेदारी साझा करते हैं, जो अमेरिका और रूस के बीच जारी गिने-चुने सहयोग क्षेत्रों में से एक है।
साल 2000 से लगातार आबाद ISS पृथ्वी से करीब 400 किलोमीटर ऊपर स्थित है और अंतरराष्ट्रीय सहयोग का प्रतीक माना जाता है। यहां होने वाला शोध भविष्य के गहरे अंतरिक्ष अभियानों, जैसे चांद और मंगल मिशन, की तैयारी में मदद करता है।
नासा अधिकारियों ने बताया कि लौटे हुए चारों अंतरिक्ष यात्री आपातकालीन मेडिकल स्थितियों से निपटने के लिए प्रशिक्षित थे और उन्होंने पूरे हालात को बेहद पेशेवर तरीके से संभाला।
ISS को 2030 के बाद सेवा से हटाने की योजना है। इसके बाद इसे धीरे-धीरे निचली कक्षा में लाकर प्रशांत महासागर के दूरदराज क्षेत्र ‘पॉइंट नीमो’ में नष्ट किया जाएगा, जिसे अंतरिक्ष यानों का कब्रिस्तान भी कहा जाता है।





