भारत-अमेरिका व्यापार समझौता जल्द, पहली चरण की घोषणा नजदीक

भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते का पहला चरण जल्द ही अंतिम रूप ले सकता है। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने गुरुवार को कहा कि दोनों देशों के बीच बातचीत अपने अंतिम दौर में है और औपचारिक घोषणा किसी तय समयसीमा पर नहीं, बल्कि आपसी सहमति और तैयारियों के आधार पर होगी।
राजेश अग्रवाल ने बताया कि भारत और अमेरिका की वार्ताकार टीमें वर्चुअल माध्यम से लगातार संपर्क में हैं और बचे हुए मुद्दों को सुलझाने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने किसी तारीख का ऐलान तो नहीं किया, लेकिन इतना जरूर कहा कि समझौते का पहला हिस्सा “बहुत करीब” है और जैसे ही दोनों पक्ष सही समय मानेंगे, इसकी घोषणा कर दी जाएगी।
पिछले कुछ महीनों में उच्चस्तरीय बैठकों से बातचीत को नई गति मिली है। 10 दिसंबर 2025 को भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर और अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि रिच स्विट्जर के नेतृत्व में एक अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ने वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल से मुलाकात की थी। इसके अगले दिन वाणिज्य भवन में राजेश अग्रवाल के साथ भी चर्चा हुई। इन बैठकों का मकसद सालभर से चल रही व्यापार वार्ताओं को आगे बढ़ाना था।
अमेरिका द्वारा लगाए गए ऊंचे टैरिफ को लेकर चिंताओं के बीच वाणिज्य सचिव ने कहा कि अमेरिकी बाजार में भारत का निर्यात अब भी मजबूत बना हुआ है। उन्होंने बताया कि भारत से अमेरिका को होने वाला मासिक निर्यात करीब 7 अरब डॉलर के आसपास स्थिर है। भारतीय निर्यातक कम टैरिफ वाले सेक्टर पर फोकस कर रहे हैं और सप्लाई चेन को भी स्थिर बनाए हुए हैं।
ऊर्जा व्यापार भी भारत-अमेरिका बातचीत का अहम हिस्सा है। हालांकि भारत अभी भी अपनी ज्यादातर कच्चे तेल की जरूरतें मध्य-पूर्व से पूरी करता है, लेकिन हाल के महीनों में अमेरिका से तेल आयात तेजी से बढ़ा है। अमेरिका चाहता है कि वह भारत को ज्यादा ऊर्जा निर्यात करे, खासकर तब जब भारत अपनी कुल ऊर्जा जरूरतों का 80 प्रतिशत से अधिक आयात करता है।
ईरान से जुड़े संभावित व्यापारिक असर पर राजेश अग्रवाल ने कहा कि फिलहाल भारत का जोखिम सीमित है। सरकार हालात पर नजर बनाए हुए है और आगे की जानकारी मिलने के बाद स्थिति का आकलन किया जाएगा।
इसके अलावा, वाणिज्य सचिव ने भारत-कनाडा व्यापार संबंधों पर भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि दोनों देशों ने फिर से व्यापार वार्ता शुरू करने पर सहमति जताई है और एक संतुलित व लाभकारी समझौते के लिए टर्म्स ऑफ रेफरेंस तय करने पर काम चल रहा है।
भारत इस समय कई देशों के साथ व्यापार समझौतों पर बातचीत कर रहा है, ताकि नए बाजार तलाशे जा सकें और लंबे समय में आर्थिक विकास को मजबूती मिल सके। आने वाले महीने भारत के लिए अहम माने जा रहे हैं, क्योंकि ये समझौते आने वाले दशक में देश की वैश्विक व्यापार स्थिति और अर्थव्यवस्था की दिशा तय कर सकते हैं।





