दिल्ली में फिर छाया जहरीला धुंध — ‘गंभीर’ श्रेणी में पहुंची हवा

दिल्ली में रविवार की सुबह फिर से घुटन भरी और धुंध से ढकी हुई नजर आई। राजधानी की हवा एक बार फिर ‘गंभीर’ (Severe) श्रेणी में पहुंच गई है और शहर प्रदूषण की मोटी परत में लिपटा हुआ है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के मुताबिक, सुबह 7 बजे दिल्ली का समग्र वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 391 दर्ज किया गया — जो बेहद खतरनाक स्तर माना जाता है।
शहर के कई इलाकों में तो AQI 400 से भी ऊपर चला गया। बवाना सबसे ज्यादा प्रदूषित क्षेत्र रहा, जहां AQI 436 दर्ज हुआ। इसके बाद पटपड़गंज (425), आर.के. पुरम (422), अलीपुर (415), सोनिया विहार (415), चांदनी चौक (409) और आनंद विहार (412) जैसे इलाकों में भी हवा बेहद खराब पाई गई। इन आंकड़ों से साफ है कि दिल्ली का लगभग हर कोना जहरीली हवा में डूबा हुआ है।
पिछले तीन दिनों में हवा की गुणवत्ता तेजी से बिगड़ी है। शुक्रवार को जहां AQI 312 था (‘बहुत खराब’ श्रेणी में), वहीं शनिवार को यह बढ़कर 355 पहुंच गया। रविवार को यह और खराब होकर 391 हो गया। गुरुवार को यही सूचकांक 271 (‘खराब’ श्रेणी) में था। CPCB के अन्य मॉनिटरिंग स्टेशनों जैसे आईटीओ (337), बुराड़ी क्रॉसिंग (345), पंजाबी बाग (343), रोहिणी (336) और द्वारका सेक्टर-8 (310) पर भी पूरे हफ्ते हवा ‘बहुत खराब’ दर्ज की गई।
दीवाली के बाद से दिल्ली और एनसीआर क्षेत्र लगातार धुंध और स्मॉग की चपेट में हैं। फिलहाल ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) का स्टेज-II लागू है, जिसके तहत निर्माण कार्यों पर रोक और पार्किंग शुल्क बढ़ाने जैसे कदम उठाए गए हैं। नई दिल्ली नगर परिषद (NDMC) ने भी पार्किंग फीस को दोगुना कर दिया है ताकि निजी वाहनों का उपयोग कम किया जा सके।
विशेषज्ञों का कहना है कि इतनी जहरीली हवा में लंबे समय तक सांस लेना गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकता है — जैसे सांस लेने में तकलीफ, आंखों में जलन और फेफड़ों से जुड़ी बीमारियां। इस सीजन में यह अब तक का सबसे खतरनाक प्रदूषण स्तर माना जा रहा है।





