Diwali: त्योहारों की रौनक में मिलावट का धंधा, नकली पनीर से सेहत पर संकट

नई दिल्ली: त्योहारों का मौसम आते ही बाजारों में पनीर की मांग आसमान छूने लगती है, लेकिन इसी बढ़ती डिमांड के साथ नकली पनीर का कारोबार भी तेजी पकड़ रहा है. बजारों में खुलेआम मिलावटी और खतरनाक रसायनों से बना नकली पनीर बेचा जा रहा है, जिससे लोगों की सेहत पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है.
त्योहारों में बढ़ी डिमांड, नकली पनीर की भरमार
जानकारी के अनुसार, त्योहारों के दौरान बाजारों में सस्ते दाम पर नकली पनीर की बिक्री धड़ल्ले से हो रही है. असली पनीर जहां 340 से 400 रुपये किलो बिकता है, वहीं नकली पनीर 150 से 200 रुपये किलो तक आसानी से मिल जाता है.
इस सस्ते पनीर को चमकदार और सफेद दिखाने के लिए यूरिया, डिटर्जेंट, टिनोपल और यहां तक कि ‘आला’ जैसे खतरनाक केमिकल का इस्तेमाल किया जा रहा है. डॉक्टरों का कहना है कि ऐसा पनीर खाने से लीवर, किडनी, दिल और डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं.
कैसे पहचानें असली और नकली पनीर
असली पनीर की पहचान:
- काटने पर अंदर हल्की चिकनाई होगी, ऊपर नहीं.
- पकाने पर मुलायम और मुंह में रखते ही घुल जाने वाला.
- हाथों से मसलने पर आसानी से पिस जाएगा.
- दूध की प्राकृतिक खुशबू आएगी.
- खाने पर दूध का स्वाद स्पष्ट महसूस होगा.
नकली पनीर की पहचान:
- ऊपर की परत पर चिकनाई, अंदर सूखापन.
- हाथों से मसलने पर रबर की तरह खिंचता है.
- दूध की जगह केमिकल की दुर्गंध आती है.
- पकाने पर मुलायम नहीं होता, बल्कि रबड़ जैसा बनता है.
- 100–150 रुपये किलो मिलने वाला पनीर लगभग हमेशा नकली होता है.
सेहत से खिलवाड़ का खेल
खाद्य विशेषज्ञों का कहना है कि नकली पनीर में इस्तेमाल होने वाले केमिकल शरीर में विषाक्तता पैदा करते हैं, जिससे किडनी, लीवर और हृदय संबंधी रोग हो सकते हैं. लंबे समय तक ऐसा पनीर खाने से शरीर के हार्मोनल संतुलन पर भी असर पड़ता है.
सावधान रहें, सस्ता पनीर महंगा पड़ सकता है
त्योहारों के इस सीजन में अगर आप सस्ता पनीर खरीदने की सोच रहे हैं, तो एक बार दोबारा सोचें. असली पनीर की पहचान आसान है — बस ध्यान रखें कि सस्ती कीमत के लालच में कहीं आप अपनी सेहत दांव पर न लगा दें.





