DGHS की एडवाइजरी: बच्चों को कफ सिरप देने से पहले सावधानी जरूरी

देश के स्वास्थ्य अधिकारियों ने बच्चों में कफ सिरप के इस्तेमाल को लेकर एक अहम चेतावनी जारी की है। मध्यप्रदेश और राजस्थान में कुछ बच्चों की मौत के बाद यह एडवाइजरी सामने आई है। इन मौतों का संबंध कफ सिरप से होने की आशंका जताई गई थी।
2 साल से कम उम्र के बच्चों को न दें कफ सिरप: स्वास्थ्य विभाग
स्वास्थ्य महानिदेशालय (DGHS) ने कहा है कि 2 साल से कम उम्र के बच्चों को किसी भी तरह का खांसी-जुकाम का सिरप न दिया जाए। वहीं 5 साल से कम उम्र के बच्चों को भी यह दवाएं आमतौर पर देने की सिफारिश नहीं की गई है।
बड़े बच्चों के लिए भी डॉक्टरों को सलाह दी गई है कि सिरप केवल तब ही दिया जाए जब उसकी सख्ती से जरूरत हो, वो भी कम से कम मात्रा और कम से कम समय के लिए। साथ ही, दवाओं के अलग-अलग कॉम्बिनेशन से बचने और माता-पिता को दवाएं सही तरीके से देने की सलाह देने को कहा गया है।
मध्यप्रदेश में नौ बच्चों की मौत, जांच में जुटी एजेंसियां
मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में 4 सितंबर से 3 अक्टूबर के बीच नौ बच्चों की मौत हो गई। परिजनों का कहना है कि बच्चों को शुरू में खांसी, जुकाम और बुखार के लक्षण थे, लेकिन बाद में उनकी तबीयत बिगड़ती गई और किडनी फेल हो गई। इस मामले की जांच के लिए केंद्र सरकार की कई एजेंसियां — जैसे नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (NCDC), नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (NIV), और सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन (CDSCO) — की टीम ने प्रभावित इलाकों का दौरा किया।
दवाओं में ज़हरीले रसायन नहीं मिले
जांच में जो सिरप के सैंपल लिए गए, उनमें डाइएथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) और एथिलीन ग्लाइकॉल (EG) जैसे ज़हरीले रसायन नहीं पाए गए, जो पहले कुछ अंतरराष्ट्रीय मामलों में बच्चों की मौत का कारण बने थे। मध्यप्रदेश की स्टेट फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने भी तीन नमूनों की जांच की और इसमें DEG और EG नहीं मिले। पुणे की NIV लैब में खून और स्पाइनल फ्लूइड की जांच में एक बच्चे में “लेप्टोस्पायरोसिस” नामक बैक्टीरियल इंफेक्शन की पुष्टि हुई है।
अभिभावकों और डॉक्टरों को दी गई सलाह
स्वास्थ्य मंत्रालय ने डॉक्टरों को सलाह दी है कि वे बच्चों को बिना ज़रूरत कफ सिरप न दें और परिजनों को दवा की मात्रा और समय का सख्ती से पालन करने के लिए समझाएं।





