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भारत में डायबिटीज की दवा Ozempic को मंज़ूरी, वजन घटाने में भी असरदार

भारत के दवा नियामक (CDSCO) ने टाइप 2 डायबिटीज के इलाज के लिए Ozempic (सेमाग्लूटाइड) नामक दवा को मंज़ूरी दे दी है। यह दवा डेनमार्क की फार्मा कंपनी Novo Nordisk द्वारा बनाई गई है और हफ्ते में सिर्फ एक बार इंजेक्शन के रूप में दी जाती है। Ozempic को सबसे पहले 2017 में अमेरिका की FDA से मंज़ूरी मिली थी। यह दवा न केवल ब्लड शुगर कंट्रोल करती है, बल्कि वजन घटाने में भी मदद करती है, जिससे इसे दुनियाभर में लोकप्रियता मिली।

भारत में इस दवा के आने से करोड़ों डायबिटीज मरीज़ों को राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि, इसकी कीमत, उपलब्धता और लंबे समय तक इस्तेमाल की सुरक्षा को लेकर कुछ सवाल बने हुए हैं।

क्या है Ozempic?

Ozempic, सेमाग्लूटाइड नामक दवा का ब्रांड नाम है, जो GLP-1 रिसेप्टर एगोनिस्ट नामक दवाओं के समूह में आती है। यह शरीर में प्राकृतिक हार्मोन GLP-1 की तरह काम करती है:

  • जब ब्लड शुगर बढ़ता है तो इंसुलिन रिलीज़ करती है

  • गैरज़रूरी ग्लूकागन को कम करती है

  • पेट को धीरे खाली करती है जिससे भूख कम लगती है

  • अधिक मात्रा में लेने पर वजन कम करने में मदद करती है

इसका एक और वर्जन Wegovy भी है, जो विशेष रूप से मोटापे के इलाज के लिए है।

फायदे: डायबिटीज ही नहीं, दिल और वजन पर भी असर

अंतरराष्ट्रीय रिसर्च में यह दवा ब्लड शुगर कम करने के साथ-साथ वजन घटाने और हृदय संबंधी जोखिम को भी कम करने में कारगर पाई गई है। भारत में इसका हफ्ते में एक बार इस्तेमाल करने का फायदा मरीज़ों को रोज़ाना इंजेक्शन लेने से राहत देगा।

साइड इफेक्ट्स: इलाज के साथ सावधानी ज़रूरी

हालांकि Ozempic के कुछ साइड इफेक्ट्स भी हैं, जैसे:

  • शुरुआत में मतली, उल्टी, पेट फूलना

  • पैंक्रियास और गॉल ब्लैडर से जुड़ी समस्याएं

  • किडनी और थायरॉयड से जुड़ी जटिलताएं

  • लंबे समय में कुछ मामलों में कैंसर का रिस्क (प्री-क्लिनिकल डेटा में देखा गया)

  • अन्य संभावित असर: विटामिन की कमी, नजर की समस्या, मूड स्विंग और चिंता

डॉक्टरों का कहना है कि बिना सलाह के इसका इस्तेमाल न करें और नियमित जांच करवाते रहें।

भारत में आगे क्या?

CDSCO की एंडोक्रिनोलॉजी और मेटाबॉलिज़्म कमेटी ने 2025 में इसकी समीक्षा कर इसे भारत में उत्पादन और बिक्री के लिए हरी झंडी दी है।

आम मरीज को कैसे फायदा मिलेगा?

Ozempic के भारत में आने से टाइप 2 डायबिटीज मरीज़ों को:

  • बेहतर ब्लड शुगर कंट्रोल

  • वजन घटाने में मदद

  • हार्ट अटैक जैसे जोखिम में कमी

जैसे फायदे मिल सकते हैं। लेकिन असली फर्क इसकी कीमत और उपलब्धता तय करेगी। अगर यह दवा सिर्फ अमीर और शहरी इलाकों तक सीमित रह गई, तो इसका लाभ सीमित रह जाएगा।

उम्मीद: जेनरिक आने से सस्ता हो सकता है इलाज

गौर करने वाली बात यह है कि सेमाग्लूटाइड का पेटेंट मार्च 2026 में खत्म हो रहा है, जिससे भारत में इसकी जेनरिक दवाएं बन सकती हैं। इससे दवा सस्ती होने और आम लोगों तक पहुंचने की उम्मीद बढ़ जाती है। Ozempic भारत में डायबिटीज के इलाज में एक बड़ा कदम हो सकता है। लेकिन इसका सही फायदा तभी मिलेगा जब यह दवा सुरक्षित, सस्ती और व्यापक रूप से उपलब्ध हो। मरीजों को सलाह दी जाती है कि वे डॉक्टर से परामर्श लेकर ही इसका इस्तेमाल करें और इलाज के दौरान नियमित रूप से जांच कराएं।

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न्यूज़ मोबाइल ब्यूरो

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