पुरी में कड़ी सुरक्षा के बीच आज भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा का शुभारंभ

भगवान जगन्नाथ के भक्तों का इंतजार लंबे समय बाद आज खत्म हुआ है. आज ओडिशा के पुरी में भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा का शुभारंभ होने जा रहा है. 12 दिनों तक चलने वाली यह यात्रा पुरी के जगन्नाथ मंदिर से शुरू होगी जो गुंडिचा मंदिर तक जाएगी. यह धार्मिक आयोजन 8 जुलाई 2025 को नीलाद्रि विजय के साथ पूर्ण होगा. वहीं इस आयोजन को लेकर पुलिस बल भी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम में जुटा है.
भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा पर, ओडिशा के ADG(कानून-व्यवस्था) संजय कुमार ने कहा, “हमारा अनुमान है कि आज यहां 10 से 12 लाख लोग जुटेंगे. उनकी सुरक्षा के लिए, यहां आने वाले लोगों और हमारे VIP दोनों के लिए भीड़ प्रबंधन की व्यवस्था की गई है. पूरे शहर को सुरक्षा कवर जोन में बदल दिया गया है. ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद, हमें खुफिया जानकारी मिली कि कुछ असामाजिक और राष्ट्र विरोधी तत्व गड़बड़ी पैदा करने का प्रयास कर सकते हैं. इसे रोकने के लिए, हमने कई दिनों तक पूरी तरह से योजना बनाई है और स्थिति पर नियंत्रण बनाए हुए हैं. कई वरिष्ठ अधिकारी और 200 से अधिक ओडिशा पुलिस प्लाटून यहां तैनात किए गए हैं. RAF की 3 कंपनियों सहित CAPF की 8 कंपनियां तैनात की गई हैं. NSG, कोस्ट गार्ड ड्रोन और एंटी-ड्रोन सिस्टम सहित कई तकनीकी टीमें ओडिशा पुलिस के साथ सहयोग कर रही हैं… हमने यहां पूरे क्षेत्र में CCTV कैमरे लगाए हैं, हर बिंदु पर नज़र रखी जा रही है.”
भगवान जन्ननाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा के सार्वजनिक दर्शन 11 जून को स्नान अनुष्ठान के बाद रोक दिए गए थे. श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) के एक अधिकारी के मुताबिक, मंदिर सुबह 8 बजे से 10.30 बजे तक भक्तों के लिए नबजौबन दर्शन के लिए खुला रहा. उन्होंने बताया कि भगवान जन्ननाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा नबजौबन बेशा पर एक खास युवा पोशाक पहनते हैं. यह अनुष्ठान भगवान जगन्नाथ के कायाकल्प का उत्सव मनाने के लिए किया जाता है. इस दिन को नेत्र उत्सव (आंख खोलने का त्योहार) भी कहा जाता है, क्योंकि इस दिन मूर्तियों की आंखों को रंगा जाता है. जगन्नाथ संस्कृति के शोधकर्ता भास्कर मिश्रा के मुताबिक, ऐसा माना जाता है कि स्नान अनुष्ठान के बाद बीमार होने के कारण देवता भक्तों के सामने प्रकट नहीं होते हैं. रथ यात्रा से पहले वे एक पखवाड़े तक अनासर घर (अलगाव कक्ष) में संगरोध में रहते हैं.





