अंतरिक्ष में सबसे लंबे समय तक रहने वाले साहसी अंतरिक्षयात्री!

अंतरिक्ष में रहना कोई आसान काम नहीं है। कई महीनों कम गुरुत्वाकर्षण में जीना, अलग-अलग परिस्थितियों में काम करना और धरती से दूर रहना बहुत बड़ी चुनौती होती है। लेकिन कुछ बहादुर अंतरिक्ष यात्रियों ने लंबे समय तक अंतरिक्ष में रहकर विज्ञान को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। आइए जानते हैं उन अंतरिक्ष यात्रियों के बारे में, जिन्होंने अंतरिक्ष में सबसे ज्यादा समय बिताया।
1.पैगी व्हिटसन – 665 दिन
पैगी व्हिटसन अमेरिका की सबसे अनुभवी महिला अंतरिक्ष यात्री हैं। उन्होंने कुल 665 दिन अंतरिक्ष में बिताए। वह दो बार अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) की कमांडर बनीं और कई बार स्पेसवॉक भी किया। उन्होंने यह दिखाया कि महिलाएं भी अंतरिक्ष में नेतृत्व कर सकती हैं।

2.सुनीता विलियम्स – 622 दिन
भारतीय मूल की अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स ने अब तक 622 से अधिक दिन अंतरिक्ष में बिताए हैं। उन्होंने कई बार अंतरिक्ष में चहलकदमी (स्पेसवॉक) की और ISS की कमान भी संभाली। उनकी उपलब्धियों से लाखों लोगों को प्रेरणा मिली है।

3.जेफ विलियम्स – 543 दिन
जेफ विलियम्स ने 543 दिन अंतरिक्ष में बिताए और ISS के निर्माण और संचालन में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने चार अलग-अलग अंतरिक्ष मिशनों में हिस्सा लिया।

4.स्कॉट केली – 520 दिन
स्कॉट केली ने अपने वन ईयर मिशन केये लिए प्रसिद्धि पाई, जिसमें उन्होंने ISS पर 340 दिन लगातार बिताए। इस दौरान उनके शरीर पर पड़ने वाले प्रभावों का अध्ययन किया गया और उनकी तुलना उनके जुड़वां भाई मार्क केली से की गई, जो धरती पर ही रहे थे।

5.वैलेरी पोल्याकोव – 437 दिन (लगातार सबसे लंबा मिशन)
रूस के अंतरिक्ष यात्री वैलेरी पोल्याकोव ने लगातार 437 दिन अंतरिक्ष में रहने का रिकॉर्ड बनाया। जनवरी 1994 से मार्च 1995 तक उन्होंने मीर अंतरिक्ष स्टेशन पर समय बिताया और यह साबित किया कि इंसान लंबे समय तक अंतरिक्ष में रह सकता है।

6.फ्रैंक रुबियो – 371 दिन
फ्रैंक रुबियो का मिशन पहले केवल 6 महीने का था, लेकिन उनके अंतरिक्ष यान में खराबी के कारण उन्हें ISS पर 371 दिन बिताने पड़े। इस तरह वे सबसे लंबे समय तक रहने वाले अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री बन गए।

7.क्रिस्टीना कोच – 328 दिन (महिला अंतरिक्ष यात्री का सबसे लंबा मिशन)
क्रिस्टीना कोच ने 328 दिन अंतरिक्ष में बिताए, जो किसी महिला अंतरिक्ष यात्री द्वारा सबसे लंबा एकल मिशन था। उनके मिशन से यह जानने में मदद मिली कि अंतरिक्ष में लंबा समय बिताने से महिलाओं के शरीर पर क्या प्रभाव पड़ते हैं।

सभी अंतरिक्ष यात्री अंतरिक्ष विज्ञान के हीरो हैं। लेकिन अंतरिक्ष से लौटने के बाद अंतरिक्ष यात्रियों को कई शारीरिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। कम गुरुत्वाकर्षण के कारण उन्हें चलने में कठिनाई, चक्कर आना और देखने में दिक्कत होती है। ‘बेबी फीट’ नामक स्थिति में उनके तलवों की कठोर त्वचा निकल जाती है, जिससे वे बेहद मुलायम हो जाते हैं।
जापानी अंतरिक्ष एजेंसी जेएएक्सए के अनुसार, अंतरिक्ष में ‘वेस्टिबुलर’ अंगों से मिलने वाली जानकारी बदलने से मस्तिष्क भ्रमित हो जाता है, जिससे ‘स्पेस सिकनेस’ होती है। पृथ्वी पर लौटने के बाद गुरुत्वाकर्षण के प्रभावों के कारण ‘ग्रैविटी सिकनेस’ हो सकती है, जिसके लक्षण स्पेस सिकनेस जैसे ही होते हैं।
गुरुत्वाकर्षण की कमी से शरीर के तरल पदार्थ ऊपर की ओर जमा हो जाते हैं, जिससे चेहरा फूला हुआ दिखता है। साथ ही, हड्डियों का घनत्व हर महीने लगभग 1% कम हो सकता है, जो अपूरणीय भी हो सकता है। इससे बचने के लिए अंतरिक्ष यात्रियों को रोज़ाना दो घंटे ट्रेडमिल या स्थिर साइकिल पर व्यायाम करना पड़ता है, ताकि वे धरती पर लौटने के बाद चलने और खड़े होने में सक्षम रहें।





