राजनीति

रायबरेली लोकसभा सीट से कांग्रेस नेता राहुल गांधी की उम्मीदवारी पर उठे सवाल, सामने आई पक्ष और विपक्ष की प्रतिक्रियाएं

उत्तर प्रदेश: अमेठी लोकसभा सीट पर चल रहा सस्पेंस आज खत्म हो गया. कांग्रेस ने सभी अटकलों को विराम लगाते हुए उम्मीदवारों की एक और सूची जारी की है. जिसमें अमेठी सीट से लड़ने वाले प्रत्याशी के नाम की भी घोषणा कर दी गयी है. लिस्ट के मुताबिक कांग्रेस नेता राहुल गांधी रायबरेली से चुनाव लड़ेंगे, तो वहीं किशोरी लाल शर्मा अमेठी से अपना नामांकन दाखिल करेंगे. वहीं रायबरेली लोकसभा सीट से कांग्रेस नेता राहुल गांधी की उम्मीदवारी पर पक्ष और विपक्ष की प्रतिक्रियाएं आना शुरू हो गई हैं.

 

रायबरेली लोकसभा सीट से कांग्रेस नेता राहुल गांधी की उम्मीदवारी पर पूर्व कांग्रेस नेता आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा, “राहुल गांधी को अमेठी लड़ना चाहिए था. अमेठी से भागने से कांग्रेस के कार्यकर्ताओं और पूरे देश में ये संदेश जाएगा कि जो आदमी रोज पीएम नरेंद्र मोदी को चुनौती देता था, रोज अपने कांग्रेस कार्यकर्ताओं और देश की जनता से कहता था कि डरो मत, वो खुद डर गया. मुझे लगता है कि ये कांग्रेस का दुर्भाग्य है.”

 

रायबरेली लोकसभा सीट से कांग्रेस नेता राहुल गांधी और अमेठी से किशोरी लाल शर्मा की उम्मीदवारी पर कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी ने कहा, “…वे(किशोरी लाल शर्मा) अमेठी में एक-एक घर, एक-एक कार्यकर्ता और एक-एक परिवार को जानते हैं… परंपरागत रूप से रायबरेली से परिवार के वरिष्ठ सदस्य को चुनाव लड़ाया जाता है… इस समय कांग्रेस में हमारे कोई सर्वोच्च नेता हैं तो वो राहुल गांधी हैं. इसलिए वे अमेठी से यहां आ गए…”

 

रायबरेली लोकसभा सीट से कांग्रेस नेता राहुल गांधी की उम्मीदवारी पर शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत ने कहा, “राहुल गांधी वायनाड से लड़ते हैं और जीतते हैं लेकिन हम सब की इच्छा थी कि गांधी परिवार से कोई न कोई उत्तर प्रदेश से लड़ना चाहिए… इंदिरा गांधी के समय से पूरा नेहरू परिवार रायबरेली से लड़ता आया है, ये एक परंपरा है. अमेठी तो कोई भी जीत जाएगा… इस बार स्मृति ईरानी लोकसभा नहीं जा रही हैं, के.एल. शर्मा जा रहे हैं.”

 

रायबरेली लोकसभा सीट से कांग्रेस नेता राहुल गांधी की उम्मीदवारी पर भाजपा नेता शाइना एन.सी. ने कहा, “…अमेठी से लड़ते हैं, अमेठी से हारते हैं. वायनाड से लड़ते हैं, वायनाड से जीतते हैं फिर 5 साल अमेठी जाते ही नहीं और अब रायबरेली से लड़ते हैं… कौन से लोग ऐसे हैं जो सोचते हैं कि दादा नहीं तो दादी, बेटा नहीं तो बेटी, बहू नहीं तो दामाद और ये परिवारवाद जो गांधी परिवार में 60 साल से चलता आ रहा है, ये अमेठी और रायबरेली की जनता के साथ धोखा है. वे(राहुल गांधी) जिस ढ़ंग से हमेशा सोचते हैं कि जनता उन्हें स्वीकार करेगी. जनता सिर्फ उन्हीं को स्वीकार करती है जो काम करते हैं… “

 

रायबरेली लोकसभा सीट से कांग्रेस नेता राहुल गांधी की उम्मीदवारी पर पटना साहिब लोकसभा सीट से भाजपा उम्मीदवार रवि शंकर प्रसाद ने कहा, “वे(राहुल गांधी) लड़ना नहीं चाहते थे, थोपा गया होगा. पहले अमेठी से हारने के बाद वायनाड चले गए… लग रहा है कि वहां से भी हारने की उम्मीद है… लगता है कि वे(राहुल गांधी) रायबरेली भी दबाव में ही गए हैं. उनकी पार्टी उन्हें कहां से चुनाव लड़ाती है ये उनका विषय है लेकिन हार की हिचक और डर उनके सामने था इसलिए जो व्यक्ति रोज प्रधानमंत्री को चुनौती दे रहा है… वो अपने पुराने प्रतियोगी से लड़ने में डरते हैं, देश क्या चलाएंगे?”

 

रायबरेली लोकसभा सीट से कांग्रेस नेता राहुल गांधी की उम्मीदवारी पर दिल्ली सरकार में मंत्री सौरभ भारद्वाज ने कहा, “INDIA गठबंधन की ये दो सीटें, अमेठी और रायबरेली कांग्रेस के हिस्से आई हैं. किस सीट से वे किसे चुनाव लड़ाते हैं ये कांग्रेस का अपना आकलन है. कौन कहां से लड़ रहा है, ये तो कोई भी किसी के विषय में पूछ सकता है. प्रधानमंत्री दक्षिण भारत से क्यों नहीं लड़ रहे हैं? ये कांग्रेस भी पूछ सकती है… लेकिन इन सब बातों से जो पूरा चुनाव है और उसके जो मुद्दे हैं वो हल्के हो जाएंगे…”

 

गौरतलब है कि अमेठी में कांग्रेस ने जिस केएल शर्मा को उम्मीदवार बनाया, वो गांधी फैमिली के करीबी माने जाते हैं. गौर करने वाली बात ये है कि साल 1998 के बाद यानी 25 साल बाद ऐसा पहली बार हुआ है कि अमेठी सीट से गांधी फैमिली का कोई शख्स चुनावी मैदान में नहीं है. आखिरी बार साल 1998 में सतीश शर्मा ने चुनाव लड़ा था, जिन्हें संजय सिंह से शिकस्त झेलनी पड़ी थी. ये वही अमेठी है जिसे दशकों से गांधी परिवार का गढ़ माना जाता रहा.

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