अमेरिका ने रूस-ईरान तेल खरीद की छूट खत्म की, भारत पर असर और कीमतों में उछाल की आशंका
आगे क्या—कीमतें बढ़ेंगी या सप्लाई बदलेगी रणनीति

Washington DC: वॉशिंगटन से आई एक अहम खबर में अमेरिका ने रूस और ईरान से सीमित तेल खरीद की अनुमति देने वाली छूट को आगे नहीं बढ़ाने का फैसला किया है। इस कदम से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बढ़ सकता है और भारत जैसे बड़े आयातक देशों पर असर पड़ने की आशंका है।
अमेरिका का फैसला और क्या कहा गया
अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी Scott Bessent ने साफ किया कि पहले दी गई अस्थायी लाइसेंस अवधि पूरी हो चुकी है और अब इन्हें नवीनीकृत नहीं किया जाएगा। उन्होंने बताया कि जिन शिपमेंट्स को छूट के तहत अनुमति दी गई थी, उनका उपयोग पहले ही किया जा चुका है।
अस्थायी राहत के लिए दी गई थी छूट
यह छूट उस समय दी गई थी जब वैश्विक बाजार में आपूर्ति बाधित होने और कीमतों में तेजी का खतरा था। इसका उद्देश्य उन तेल खेपों को मंजूरी देना था जो पहले ही लोड होकर समुद्र में थीं, ताकि वे अपने गंतव्य तक पहुंच सकें।
यह कदम खास तौर पर तब अहम हो गया था जब Strait of Hormuz क्षेत्र में तनाव बढ़ा और यह मार्ग, जो दुनिया के बड़े हिस्से का तेल और गैस परिवहन करता है, प्रभावित होने लगा।
भारत को मिला था बड़ा फायदा
भारत, जो दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातकों में शामिल है, इस छूट से काफी लाभान्वित हुआ। इस दौरान भारतीय रिफाइनरियों ने रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारतीय कंपनियों ने करीब 30 मिलियन बैरल रूसी तेल का ऑर्डर दिया।
Reliance Industries जैसी कंपनियों ने पहले अमेरिकी दबाव में खरीद कम की थी, लेकिन बाद में अनुकूल कीमतों के चलते फिर से आयात शुरू किया। इसी दौरान कई साल बाद ईरान से भी तेल की खेप भारत पहुंची।
अब आगे क्या असर पड़ेगा
छूट खत्म होने के बाद भारत को अपनी तेल खरीद रणनीति में बदलाव करना पड़ सकता है। अब उसे मध्य पूर्व, अमेरिका और अन्य देशों पर अधिक निर्भर होना पड़ सकता है।
इस फैसले से पहले से दबाव में चल रहे वैश्विक तेल बाजार में और अस्थिरता बढ़ने की संभावना है, जिससे आने वाले समय में कीमतों में उतार-चढ़ाव तेज हो सकता है।





