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G7 Summit के बाद बड़ा घटनाक्रम, ट्रंप ने ईरान समझौते पर किए हस्ताक्षर

वर्साय (फ्रांस): अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को ईरान के साथ एक ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिसका उद्देश्य तीन महीने से अधिक समय से जारी मध्य पूर्व संघर्ष को समाप्त करना है। इस समझौते से वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर दबाव कम होने और दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के फिर से पूरी तरह खुलने की उम्मीद बढ़ गई है।

यह समझौता G7 Summit के समापन के बाद फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों द्वारा आयोजित रात्रिभोज के दौरान वर्साय पैलेस में हस्ताक्षरित किया गया।

मैक्रों बोले- स्थायी शांति की दिशा में बड़ा कदम

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इस समझौते को क्षेत्रीय स्थिरता की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।

उन्होंने कहा कि यह समझौता स्थायी शांति का मार्ग प्रशस्त करता है और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने में मदद करेगा। मैक्रों के अनुसार इससे ऊर्जा कीमतों में भी राहत मिलने की संभावना है।

ईरान ने भी की समझौते की पुष्टि

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने पुष्टि की कि दोनों देशों के राष्ट्रपतियों द्वारा समझौते के दस्तावेज पर औपचारिक हस्ताक्षर किए जा चुके हैं।

उन्होंने कहा कि अब सबसे बड़ी चुनौती इस समझौते को जमीन पर लागू करना होगी।

क्या है ‘इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग’?

आधिकारिक रूप से इस दस्तावेज का नाम “Islamabad Memorandum of Understanding between the United States of America and the Islamic Republic of Iran” रखा गया है।

इस समझौते के तहत:

  • सभी मोर्चों पर सैन्य अभियानों को तत्काल और स्थायी रूप से रोकने पर सहमति बनी।
  • अमेरिका 30 दिनों के भीतर ईरान पर लगाए गए नौसैनिक प्रतिबंधों को हटाएगा।
  • क्षेत्रीय समुद्री मार्गों पर सामान्य व्यापारिक गतिविधियां धीरे-धीरे बहाल होंगी।
  • अंतिम शांति समझौते के बाद अमेरिका ईरान के आसपास तैनात अपनी सैन्य मौजूदगी कम करेगा।
  • ईरान अगले 60 दिनों तक व्यावसायिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करेगा।
  • समुद्री व्यापार और जहाजों की आवाजाही पर किसी अतिरिक्त शुल्क का बोझ नहीं डाला जाएगा।

60 दिन की बातचीत का नया दौर शुरू

समझौते के साथ ही दोनों देशों के बीच 60 दिन की नई वार्ता अवधि शुरू हो गई है। इस दौरान वॉशिंगटन और तेहरान एक व्यापक और स्थायी शांति समझौते को अंतिम रूप देने की कोशिश करेंगे।

हालांकि इस समझौते पर हस्ताक्षर फ्रांस में हुए हैं, लेकिन जिनेवा में प्रस्तावित बैठक अपने तय कार्यक्रम के अनुसार आयोजित की जाएगी।

110 दिन पुराने संघर्ष का अंत

यह समझौता लगभग 110 दिनों से जारी उस संघर्ष को समाप्त करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है, जिसकी शुरुआत 28 फरवरी को अमेरिकी और इजरायली सैन्य हमलों के बाद हुई थी।

इस युद्ध के कारण मध्य पूर्व में तनाव बढ़ा, समुद्री व्यापार प्रभावित हुआ और वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर चिंताएं गहरा गई थीं। खास तौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा को लेकर दुनिया भर के ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता देखी गई थी।

दुनिया की नजर अब अमल पर

कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि समझौते पर हस्ताक्षर होना महत्वपूर्ण है, लेकिन इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि दोनों पक्ष आने वाले हफ्तों में इसकी शर्तों को किस तरह लागू करते हैं।

यदि समझौता सफलतापूर्वक लागू होता है, तो यह मध्य पूर्व में स्थिरता, वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए बड़ी राहत साबित हो सकता है।

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न्यूज़ मोबाइल ब्यूरो

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